बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। बैतूल शहर में लगभग 50 फीसदी घरों में पेयजल की आपूर्ति उन घरों के निजी बोर से ही होती है और सामान्य तौर पर नागरिक यह मानते है कि बोर का पानी साफ और शुद्ध होता है इसलिए वे इसे सीधे पीने में इस्तेमाल करते है। खास बात यह है कि बोर खनन के बाद बैतूल में कोई भी व्यक्ति उसके पानी का परीक्षण लैब में नहीं कराता है। जबकि जिला मुख्यालय पर पीएचई की एक सुव्यवस्थित लैब है इसके बावजूद पानी का परीक्षण कराने में किसी की कोई रूचि नहीं है। सामान्य तौर पर यह भी सामने आता है कि विभिन्न मकानों में वहां के सेप्टी टैंक और बोर के मध्य बहुत ज्यादा दूरी भी नहीं है ऐसे में इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि उक्त बोर में टैंक का पानी भी सीपेज कर सकता है। यह सब होने के बावजूद भी निजी बोर का पानी टेस्ट ना होना अपने आप में बड़ा सवाल है और इस वजह से भविष्य में भागीरथपुरा जैसा कांड भी हो सकता है?

 

- बोर के पानी में हो सकता है ई-कोलाई...

 सेप्टी टैंक या नाले से बहुत निकट होने पर बोर में होने वाले पानी के सीपेज में ई कोलाई का अंदेशा रहता है और यह एक जीवाणु है जो आमतौर पर मनुष्यों और जानवरों की आंतों में पाया जाता है। अधिकांश प्रकार हानिरहित हैं और पाचन में मदद करते हैं, लेकिन कुछ प्रजातियां दूषित भोजन या पानी के माध्यम से गंभीर दस्त, पेट में ऐंठन, उल्टी और मूत्र संक्रमण का कारण बन सकती हैं। यह एक ग्राम-नेगेटिव, रॉड के आकार का बैक्टीरिया है।

 

- ई-कोलाई के बारे में यह भी जाने...

प्राकृतिक आवास: यह स्वस्थ मनुष्यों और जानवरों के पाचन तंत्र का एक सामान्य हिस्सा है।

संक्रमण का कारण (हानिकारक स्ट्रेन): कुछ प्रकार, जैसे ह्र157:॥7, शिगा टॉक्सिन (विषाक्त पदार्थ) छोड़ते हैं जो आंतों की परत को नुकसान पहुंचाते हैं।

लक्षण: संक्रमण के लक्षणों में पेट में तेज ऐंठन, दस्त (अक्सर खूनी), और उल्टी शामिल हैं, जो आमतौर पर बैक्टीरिया के संपर्क में आने के 3-4 दिन बाद शुरू होते हैं।

फैलाव: यह बैक्टीरिया दूषित पानी, अधपके मांस, बिना पाश्चुरीकृत दूध, और संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क से फैलता है।

बचाव: खाने से पहले हाथ धोना, मांस को अच्छी तरह पकाना, और फलों/सब्जियों को धोकर इस्तेमाल करना इसके संक्रमण से बचने के प्रमुख उपाय हैं।

नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 22 मार्च 2026