(बैतूल) अवैध कालोनाईजिंग इसलिए हो रही कि नियम से हर तीन माह में कालोनियों की जानकारी सार्वजनिक ही नहीं करते , - कालोनाईजिंग के मामले में अवैध कालोनाईजर के प्रति साफ्ट कार्नर रखते है अधिकारी
बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। कालोनाईजिंग को लेकर एक प्रक्रिया है कि हर तीन माह में ग्रामीण और शहरी क्षेत्र की संबंधित निकाय और प्राधिकृत अधिकारी द्वारा उसके क्षेत्र की कालोनियों की तमाम जानकारी सार्वजनिक किया जाना चाहिए, लेकिन बैतूल में ऐसा नहीं हो रहा है और इसलिए अवैध कालोनाईजिंग चरम पर है? लोग एकड़, दो एकड़ या चार एकड़ जमीन खरीदकर वहां प्लॉट काटकर बेच देते है और बाद में खरीदने वाले हैरान परेशान होते है। एक रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर ने बताया कि शहरी क्षेत्र में कलेक्टर या संबंधित नगरीय निकाय द्वारा और ग्रामीण क्षेत्र में एसडीएम द्वारा कालोनियों के संबंध में हर तीन माह में जानकारी सार्वजनिक करना चाहिए? उन्हें सूचना पटल पर कालोनी से संबंधित जानकारी चस्पा करना चाहिए? उनका कहना है कि यह कालोनाईजिंग एक्ट में है , लेकिन इसका पालन ही नहीं होता है? वर्तमान में बैतूल एसडीएम क्षेत्र में ही ग्रामीण और शहर में लगभग एक दर्जन से ज्यादा वैध और अवैध कालोनियों में प्लॉट बेचे जा रहे है? मार्च के अंत में जो रजिस्ट्रियां हुई है यदि उसकी जांच करा ली जाए तो कालोनाईजिंग से संंबंधित अधिकारियों को बिल्कुल स्पष्ट हो जाएगा कि कौनसी वैध कालोनी है और कौनसी अवैध कालोनी है? बताया गया कि कालोनी विकास की अनुज्ञा के मामले में भी एसडीएम कार्यालय या नगरपालिका से आंख बंद कर अनुमतियां दी जाती है? यह भी नहीं देखा जाता कि कोई पूर्व अवैध कालोनाईजर रहा है तो उसे अनुमति नहीं दी जाए? वहीं टीएनएसपी तो हाईटेंशन लाईन की जानकारी छिपाकर भी पंजीयन कर लेती है? कालोनी में आने-जाने के लिए निर्धारित चौड़ाई का रास्ता है या नहीं यह भी टीएनसीपी नहीं देखती है? इस तरह की दी जाने वाली अनुमति को लेकर लेनदेन के आरोप इसलिए लगते है?
- कालोनियां प्रबंधन में ना लेने से अवैध कालोनाईजर सबसे ज्यादा खुश...
बताया जा रहा है कि पिछले दो वर्ष से जिला मुख्यालय बैतूल और उसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्र में अवैध कालोनियों के मामले में प्रबंधन की कार्रवाई करना ही बंद कर दी गई है? कालोनियों को प्रबंधन में ना लेने से इन कालोनियों में रजिस्ट्रीयां हो जाती है? यह बात तमाम जिम्मेदार अधिकारियों को पता है, लेकिन इसके बाद कालोनियों को प्रबंधन में नहीं लिया जाता है? यदि एफआईआर के लिए आवेदन भी दिया जाता है तो एफआईआर भी दर्ज नहीं होती? इसका उदाहरण हनोतिया की खसरा नंबर 20 की कालोनी है जिसे प्रबंधन में नहीं लिया गया और एफआईआर भी पुलिस ने दर्ज नहीं की?
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 07 अप्रैल 2026


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