बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। लगभग ढाई वर्ष बैतूल में कलेक्ट्ररी करने के बाद प्रमोटी आईएएस नरेन्द्र सूर्यवंशी बतौर रीवा कलेक्टर जा रहे है, वहीं उनकी जगह लेने डायरेक्ट आईएएस डॉ. सौरभ संजय सोनवाने आ रहे है। एक प्रमोटी और एक डायरेक्ट आईएएस के कामकाज में क्या फर्क होता है और कितना फर्क होता है इस पर सबकी नजर रहेेगी? नरेन्द्र सूर्यवंशी बैतूल आने के पहले भी कई घाट का पानी पी चुके थे, वहीं डॉ. सौरभ पहली बार कलेक्ट्ररी संभालने जा रहे है। इसलिए काम के तरीके को लेकर अंतर स्वाभाविक रूप से देखने में आ सकता है? वैसे इस बदलाव से प्रशासनिक सिस्टम के अधिकारी और कर्मचारी खासे खुश है। क्योंकि उन्होंने लगातार दो वर्ष तक तमाम तरह की बदतमीजी और गालियां तक बर्दाश्त की है! इसके कई उदाहरण सामने आते रहे है जिसमें जिले के अधिकारियों ने नरेन्द्र सूर्यवंशी के जुबान पर कंट्रोल ना होने को लेकर दबी जुबान में अपनी पीड़ा जाहिर की है? अब वे उम्मीद कर रहे है कि कम से कम जो नए कलेक्टर आ रहे है वे इस तरह का बर्ताव तो नहीं करेंगे। पूरे प्रशासनिक सिस्टम में शुक्रवार को एक अजीब तरह की खामोशी थी। इस खामेशी तो यह तो महसूस हो रहा था कि नरेन्द्र सूर्यवंशी के जाने से किसी भी अधिकारी, कर्मचारी की कोई खास फर्क नहीं पड़ा। ऐसा लग रहा था कि प्रशासनिक सिस्टम के अधिकारी, कर्मचारी लंबे समय से इस तबादले का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही गुरूवार रात आईएएस अधिकारियों की तबादला सूची आई वैसे ही अधिकारियों और कर्मचारियों ने एक दूसरे को व्हाट्सएप पर सूची फारवर्ड कर स्माईली भेजी। 
डॉ. सौरभ को अपनी प्राथमिकता थोपने की जगह जिले की प्राथमिकता को समझना होगा
बैतूल अन्य जिलों से थोड़ा अलग है। ऐसी स्थिति में बतौर कलेक्टर बैतूल आ रहे है डॉ. सौरभ को बैतूल में अपनी प्राथमिकताएं तय नहीं करना चाहिए बल्कि उन्हें थोड़ा समय लेकर बैतूल की प्राथमिकता को समझना चाहिए और उसके आधार पर अपना वर्किंग प्लॉन बनाना चाहिए? उन्हें बैतूल में अपनी अधीनस्थ अधिकारी, कर्मचारियों  के साथ बैतूल की मीडिया और राजनेताओं को लेकर भी अच्छा होमवर्क करना चाहिए? जिससे कि वे किसी भ्रम का शिकार ना हो और अपनी पहली कलेक्टरी में कुछ ऐसा करके जाए जो बैतूल वालों के लिए यादगार बने।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 11 अप्रैल 2026