- बैतूल विधायक एवं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने किया सुधांशु महाराज का स्वागत

बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा । पुलिस ग्राउंड में आयोजित  परमपूज्य सुधांशु महाराज के सत्संग में अंतिम दिवस में बैतूल विधायक एवं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने उनका स्वागत किया। महाराज ने कहा कि सत्संग अपने आप में सबसे बड़ा अनुशासन है और जो व्यक्ति इससे जुड़ जाता है, उसका जीवन स्वतः संयमित हो जाता है। उन्होंने कहा कि परमात्मा से यह कामना करनी चाहिए कि जीवन का जो समय शेष है वह विशेष बने और कठिन समय में महाकाल की शरण ही मनुष्य को संभालती है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य जब भगवान से दूर होता है तो खुद को अकेला समझता है, लेकिन ईश्वर से जुड़ने के बाद वही व्यक्ति आत्मविश्वास से भरकर हर परिस्थिति पर भारी हो जाता है। मन की चंचलता पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि मन प्रेम और द्वेष के बीच भटकता है, इसलिए उसे साधना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मनुष्य शरीर, मन या बुद्धि नहीं बल्कि अजर-अमर आत्मा है और आनंदित रहना उसका स्वभाव है, जिसके लिए जीवन में संतुलन जरूरी है।
महाराज ने कहा कि रोने से दुख कम नहीं होता बल्कि बढ़ता है, समाधान केवल युक्ति, रणनीति और साहस से निकलता है। उन्होंने कहा कि भाग्य कोई और नहीं बदलता, अपनी हाथ की रेखा खुद ऊंची करनी पड़ती है। समाज में ऊंच-नीच का भेद खत्म करने की जरूरत बताते हुए उन्होंने कहा कि शक्तिशाली बनने के लिए केवल मनुष्य जाति का भाव रखना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि धन अधिक है तो उसे भगवान के द्वार और समाज सेवा में लगाना चाहिए।

- जीवन में मार्गदर्शक का होना जरूरी...
उन्होंने कहा कि गुरु ही जीवन में ज्ञान, शक्ति, ऊर्जा और दिशा देता है, इसलिए जीवन में मार्गदर्शक का होना जरूरी है। प्रातः और सायंकाल भगवान को समय देने का संदेश देते हुए उन्होंने सत्संग के बाद मंत्र दीक्षा का आयोजन कराया, जिसमें श्रद्धालुओं ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि वातावरण से ही मनुष्य में परिवर्तन आता है और सकारात्मकता से ही जीवन में ऊर्जा का संचार होता है।

- मनुष्य को जीवन जीने की कला सिखाता है गुरु...
उन्होंने कहा था कि जैसे कुम्हार मिट्टी को आकार देता है, वैसे ही गुरु मनुष्य को जीवन जीने की कला सिखाता है। गुरु धर्म, निष्ठा, नियम और सत्कर्म का मार्ग दिखाता है और उसकी कृपा से सामान्य व्यक्ति भी महान बन सकता है। उन्होंने कहा कि आदतें बिगड़ती हैं तो जीवन बिगड़ता है और रिश्ते धन से नहीं प्रेम से बनते हैं, जैसे ईंटों के बीच सीमेंट मजबूती देता है वैसे ही प्रेम रिश्तों को मजबूत करता है।

- माता-पिता ही परम गुरु...
महाराज ने कहा कि मां का समर्पण सबसे बड़ा होता है और पिता जीवनभर अपने परिवार के लिए संघर्ष करता है, अपने सपनों को पीछे रखकर बच्चों को ऊंचाइयों तक पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि घर में माता-पिता ही परम गुरु हैं और उनका सम्मान सर्वोपरि है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि दुनिया को सच्ची शांति और प्रेम चाहिए तो भारत की आध्यात्मिक परंपरा को अपनाना होगा, जहां भक्ति, योग, ध्यान और संस्कार जीवन का आधार हैं।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 12 अप्रैल 2026