बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। बैतूल जनपद अंतर्गत वर्ष 2025 में आयोजित कन्यादान विवाह समारोह घोटाले की मिसाल बन गया है? इस सामुहिक विवाह में टेंडर से ही इस बात का प्रमाण मिलने लगा था कि जनपद के अधिकारी वेंडर के साथ मिलकर शासन को चूना लगाने में कोई कसर बाकी नहीं रखना चाह रहे? इसलिए तमाम नियम और प्रक्रिया को ताक पर रखकर एक नई शर्त जोडक़र बैतूल जनपद में सबसे महंगा भोजन का टेंडर हुआ था? टेंडर भी ऐसे व्यक्ति को दिया गया जिसका भोजन बनाने के काम से कोई लेना देना नहीं? इसी से यह सिद्ध हो गया था कि यह घोटाला है। इस घोटाले में अब जब भुगतान हुआ तो यह प्रमाणित हो गया कि वेंडर ने अधिकारियों को रिश्वत खिलाकर नियम विरूद्ध मनमाना भुगतान लिया है? इस विवाह में दो बड़े भुगतान अधिकारियों ने कमीशन के आधार पर कर दिए है। अब छोटे भुगतान में इशारा किया जा रहा है कि आओ और भुगतान लो।

- 44 लाख 10 हजार मिली थी राशि...
प्रति जोड़े 6 हजार रूपए के हिसाब से व्यवस्था के लिए शासन देता है, इसमें 735 जोड़े के लिए कुल 44 लाख 10 हजार रूपए की राशि बैतूल जनपद को दी गई। 

- 36 लाख 10 हजार का भुगतान...
44 लाख 10 हजार में से भोजन और टेंट में 36 लाख 10 हजार रूपए का भुगतान कर दिया? इन भुगतान को लेकर फर्जीवाड़े और कमीशनबाजी के ना केवल आरोप बल्कि प्रमाण है।

- पूर्व में आई थी ऑडिट आपत्ति...
वर्ष 2024 में बैतूल जनपद में 11 सौ जोड़ों का विवाह हुआ था तब जनपद सीईओ अपूर्वा सक्सेना ने अपनी मनमर्जी से शेष बची राशि में घडिय़ा बांट दी थी जिस पर ऑडिट आपत्ति आई थी। 

- दखल... हर शाख पर उल्लू बैठा है अंजाम ए गुलस्ता क्या होगा..?
बैतूल जनपद का यह मामला बताता है कि भ्रष्टाचार भोजन जैसे मामले में भी अपनी घुसपैठ बना चुका है और अधिकारियों में कोई नैतिकता नहीं बची है? अब ऐसी स्थिति में इस पूरे मामले में जांच कराने की जिम्मेदारी जनपद बैतूल के जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ जिला पंचायत के जनप्रतिनिधियों की भी है और इनसे ज्यादा जिम्मेदारी सांसद और विधायक की है उन्होंने भी सामुहिक विवाह का भोजन चखा था? इसलिए वे अच्छे से जानते है कि वहां कितने लोगों ने भोजन किया?
नवल वर्मा,हेडलाइन बैतूल 21 अप्रैल 2026