(बैतूल) खाद के ई-टोकन सिस्टम में सबसे बड़ी समस्या फार्मर आईडी में खसरा और रकबा दर्ज ना होना , - पटवारियों ने आईडी बनाने में जो लापरवाही की वह किसानों पर पड़ रही भारी
बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। इन दिनों सरकार खेती किसानी में भी तकनीकी सिस्टम लागू कर रही है, लेकिन सिस्टम लागू करने के पहले उसका विधिवत परीक्षण नही होता और एकदम से लागू कर दी जाती है? इससे कई तरह की समस्याएं खड़ी होती है। जैसा इन दिनों समर्थन मूल्य में गेहूं खरीदी में हो रहा है और इसके साथ ही खाद के मामले में भी किसान हैरान, परेशान हो रहा है। सरकार ने खाद के विक्रय के लिए ई-टोकन सिस्टम लागू किया है, बिना ई-टोकन के किसान को खाद नहीं दी जा रही है, ई-टोकन फार्मर आईडी से ही जनरेट होता है। किसान की फार्मर आईडी में जो खसरा और रकबा दर्ज होगा उसी के आधार पर खाद का ई-टोकन जनरेट होगा। जब बैतूल में महा राजस्व अभियान के तहत फार्मर आईडी बनाई जा रही थी तब आईडी बनाने में अव्वल नंंबर दिखाने के चक्कर में पटवारियों ने किसानों की फार्मर आईडी तो बना दी, लेकिन उन्होंने उसमें उसके खसरे और रकबे की जानकारी दर्ज करने में खुली लापरवाही की? अब इस लापरवाही का खामियाजा यह है कि खाद का ई-टोकन जनरेट होने में समस्या खड़ी हो रही है। जो ई-टोकन का सिस्टम है वह साफ़्टवेयर आधारित है। इसलिए जितना रकबा और उसमें फसल के आधार पर खाद की मात्रा तय हो जाती है और जितनी मात्रा तय होगी उतनी ही खाद ई-टोकन में मिलेगी, इसलिए किसानों को हैरान परेशान होना पड़ रहा है। राजस्व विभाग शिविर लगाकर अब फार्मर आईडी में रकबे चढ़ा रहा है, लेकिन यह प्रक्रिया लंबी और मुश्किल है, इसमें समय लगेगा। जब तक फार्मर आईडी का मसला हल नहीं होगा तब तक किसान क्या करेगा यह बड़ा सवाल है? इसका जवाब किसी के पास नहीं है। पूरे मामले में अधिकारी और जनप्रतिनिधि दोनों यह नहीं बता रहे कि फार्मर आईडी में की गई लापरवाही किसानों को भारी पड़ रही है।
- डीएपी की डिमांड करने पर यूरिया कम कर देता ई-टोकन साफ्टवेयर...
एक जागरूक किसान ने बताया कि ई-टोकन कम्प्यूटर साफ्टवेयर से जनरेट हो रहा है। किसान द्वारा फसल बताए जाने पर रकबे के आधार पर उस फसल में कितनी खाद लगेगी उस मात्रा में खाद का टोकन जनरेट होता है। यदि किसी किसान ने डीएपी मांगा तो यूरिया की मात्रा अपने आप कम हो जाती है। यदि कोई एनपीके मांगता है तो उसे अन्य खाद की मात्रा पर्याप्त मिलती है।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 24 अप्रैल 2026


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