बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। खाड़ी युद्ध शुरू होने के बाद तब तक डीजल, पेट्रोल को लेकर किसी भी तरह की किल्लत सामने नहीं आई जब बंगाल सहित पांच राज्यों में चुनाव नहीं हो गए। जैसे ही चुनाव हुए इसके बाद डीजल, पेट्रोल को लेकर तेल कंपनियों की पॉलिसी में ही जमीन आसमान का अंतर नजर आने लगा और अब धीरे-धीरे स्थितियाँ और बदलते जा रही है। शहर के पेट्रोल पंप संचालकों ने बताया कि पांच राज्यों में चुनाव के पहले और बाद की स्थिति में तेल कंपनियों के व्यवहार और पॉलिसी में जमीन आसमान का अंतर हो गया है। जो तेल कंपनियां उधार में टैंकर दे दिया करती थी, हमारे पंप का टैंक फूल होने के बाद भी टैंकर भेजकर खड़ा करवा देती थी। वहीं कंपनियां अब एडवांस भुगतान करने पर तीन-तीन, चार-चार दिन तक टैंकर नहंी भेज रही है और टैंकर लेने के लिए भी भारी मशक्कत करनी पड़ती है। 

- अधिकतम 200 लीटर ईधन वह भी वाहन में...
डीजल कंपनियों की पॉलिसी के अनुसार अब पेट्रोल पंप संचालक चार पहिया वाहन में अधिकतम 200 लीटर डीजल एक बार में दे रहे है। इससे ज्यादा डीजल देने की साफ मनाही है। अब केन या कुप्पी में डीजल नहीं दिया जाएगा जिसकी वजह से किसान तबका सबसे ज्यादा नाराजगी जाहिर करते हुए पंप संचालकों पर दिखाई देता है। 

- खुला तेल केवल जेरी केन में ही दे रहे है...
इधर पंप संचालकों ने बताया कि कंपनी की पॉलिसी के अनुसार खुले में डीजल, पेट्रोल नहीं दिया जाना है। यदि किसी को बिना वाहन के डीजल या पेट्रोल चाहिए तो उसे जेरी केन लेकर आना होगा। जिसमें अधिकतम 20 लीटर ही डीजल या पेट्रोल आता है। इसकी कीमत करीब 1200 रूपए है। यह लॉक्ड रहती है और इसमें नोजल लगा रहता है।

- कीमतें तो तेजी से बढ़ रही पर सडक़ पर वाहन नहीं घट रहे...
डीजल, पेट्रोल की किल्लत में प्रधानमंत्री ने अपील भी की थी, लेकिन उसका कोई असर सडक़ पर दिखाई नहीं दे रहा है। बैतूल शहर की सडक़ों पर पहले की तरह ही वाहन दौड़ते हुए नजर आ रहे है। दो पहिया से लेकर हैवी व्हीकल तक शहर की सडक़ों पर पहले की तादाद में ही दिखाई देना बता रहा है कि महंगे होतेे ईधन का असर दिख नहीं रहा।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 29 मई 2026