- चिंता नहीं, चिंतन करो; चिंतन से मिलते हैं गोविंद : भागवताचार्य

विश्वकर्मा समाज समिति आमला के पदाधिकारियों का कथा में सम्मान

बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा । विश्वकर्मा मंदिर गंज में पांचवें दिन आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में भागवताचार्य ने श्रद्धालुओं को भक्ति, सेवा और चिंतन का महत्व बताते हुए कहा कि भगवान अहंकार को कभी सहन नहीं करते। उन्होंने कहा कि जीवन में विजय प्राप्त करने के लिए तीन प्रमुख सेवाएं आवश्यक हैं गौ सेवा, गुरु सेवा और संत-ब्राह्मण सेवा। जो व्यक्ति गौ सेवा करता है, वह सीधे भगवान की सेवा करता है। कथा के दौरान श्रद्धालुओं को धर्म, संस्कार और आध्यात्मिक जीवन से जुड़े अनेक प्रेरणादायक संदेश दिए गए।
भागवताचार्य ने कहा कि मनुष्य की दो आंखें होती हैं, एक ज्ञान की और दूसरी वैराग्य की। धर्म कार्यों में सहयोग करना चाहिए, बाधा नहीं पहुंचानी चाहिए। उन्होंने शुक्राचार्य का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि धर्म कार्य में व्यवधान डालने पर भगवान ने उनकी एक आंख ले ली थी। उन्होंने कहा कि भगवान की एक कथा भी मनुष्य को ज्ञान प्रदान करती है। सूर्य के बिना जीवन संभव नहीं और चंद्रमा के बिना स्वास्थ्य नहीं रह सकता। भगवान का आशीर्वाद कभी निष्फल नहीं जाता।

- पूजा-पाठ की विधि बताई...
कथा में पूजन-पाठ की सही विधि भी बताई गई। भागवताचार्य ने कहा कि पूजा सदैव आसन पर बैठकर करनी चाहिए तथा पूजा के बाद आसन के नीचे जल डालकर उसे माथे से लगाना चाहिए। उन्होंने बताया कि आसन ऊनी अथवा कुश का होना शुभ माना जाता है। उन्होंने कहा कि भगवान अपना अपमान सहन कर सकते हैं, लेकिन अपने भक्त का अपमान कभी सहन नहीं करते।

- चिंता नहीं, चिंतन करने का संदेश...
भागवताचार्य ने श्रद्धालुओं को चिंता छोड़कर चिंतन करने का संदेश देते हुए कहा कि चिंता से बीपी और शुगर जैसी बीमारियां बढ़ती हैं, जबकि चिंतन से भगवान गोविंद की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि जिस परिवार में एक भी सच्चा भक्त पैदा हो जाता है, वह पूरे कुल को भगीरथ की तरह तार देता है। जब भगवान किसी व्यक्ति के जीवन में आते हैं, तब मोह-माया की बेड़ियां स्वतः टूट जाती हैं।

- गौ माता की महिमा का वर्णन...
कथा में गौ माता की महिमा का विशेष रूप से वर्णन किया गया। उन्होंने कहा कि गौमूत्र और गोबर अत्यंत पवित्र होते हैं और भगवान भी किसी दैत्य या राक्षस का वध करने के बाद गौमूत्र और गोबर से शुद्धि करते हैं। उन्होंने देशी गौ माता की सेवा करने का आह्वान करते हुए कहा कि देशी गाय की पूंछ बाल रक्षा कवच के समान मानी जाती है। उन्होंने बताया कि घर के द्वार पर देवताओं का वास होता है तथा देहरी पर भगवान नरसिंह का निवास माना गया है।

- श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन...
भागवताचार्य ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन करते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने असुर मारो अभियान चलाते हुए सबसे पहले पूतना का वध किया था। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की मनमोहक लीलाओं का वर्णन सुन श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कार्यक्रम में मटकी फोड़ उत्सव का आयोजन किया गया तथा बाल कृष्ण गोपाल को मक्खन और छप्पन भोग अर्पित किया गया।

- श्रद्धालुओं ने घर से लाए पकवान...
कथा की विशेष बात यह रही कि सभी यजमान अपने-अपने घरों से विभिन्न प्रकार के पकवान बनाकर मंदिर पहुंचे और बाल गोपाल को भोग लगाया। श्रद्धालुओं ने बड़े हर्षोल्लास और भक्ति भाव से कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान विश्वकर्मा समाज समिति आमला के पदाधिकारी भी कथा श्रवण के लिए पहुंचे, जिनका गुरुजी द्वारा सम्मान किया गया।

- अधिक संख्या में पहुंचने की अपील...
आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में विश्वकर्मा मंदिर पहुंचकर श्रीमद्भागवत कथा श्रवण कर पुण्य लाभ लेने की अपील की है।