बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। तबादलों का सीजन आ चुका है और इस सीजन में जो शिक्षक या अन्य कर्मचारी, अधिकारी अपने तबादलों के लिए प्रयासरत है वे राजनैतिक हल्के से लेकर प्रशासनिक गलियारे तक जुगाड़ ढूंढ रहे है। इस बार जो ट्रांसफर पॉलिसी सामने आई है उसमें स्वैच्छिक तबादलों को लेकर शिक्षकों के मन में ई-अटेंडेंस को लेकर सबसे बड़ा खटका है। शिक्षकों से चर्चा में सामने आया कि तबादला नीति में वे ही शिक्षक स्वैच्छिक तबादले के लिए आवेदन कर सकेंगे जिनकी जनवरी से मार्च के मध्य ई-अटेंडेंस रेगुलर लगाई हो। इन तीन माह के दौरान जिनकी 90 फीसदी अटेंडेंस होगी वही स्वैच्छिक तबादलों के लिए पात्रता रखेंगे। खास बात यह है कि प्रशासनिक तबादलों के लिए इस तरह की कोई शर्त नहीं रखी है। यह प्रशासनिक तबादले प्रभारी मंत्री और शिक्षा मंत्री के अनुमोदन पर होते है। इन तबादलों में स्थानीय राजनीति का भी हस्तक्षेप रहता है जो दिखाई नहीं देता है। कहा जाता है कि सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधि और पार्टी पदाधिकारी इस तरह के तबादलों में रोल निभाते है इसलिए शिक्षक इन दिनों इनके आसपास दिखाई दे रहे है। 
यह तीन कारण शिक्षकों के तबादले में बनेगे बड़ी बाधा
 शिक्षकों की चर्चा से तबादला नीति को लेकर जो जानकारी सामने आ रही है उसके अनुसार तीन कारणों से स्वैच्छिक तबादले के लिए 90 फीसदी शिक्षकों के दरवाजे बंद हो चुके है। इनका पहला कारण ई-अटेंडेंस है। जिसमें जनवरी से मार्च के मध्य 90 फीसदी अटेंडेंस होना अनिवार्य है। बताया गया कि जनवरी और फरवरी के मध्य शिक्षकों की ई-अटेंडेंस में भारी गिरावट थी। अधिकांश शिक्षक इस वजह से आवेदन ही नहीं कर पाएंगे। दूसरी बड़ी वजह जनगणना ड्यूटी है जिसमें बड़ी संख्या में शिक्षक प्रगणक या सुपरवाईजर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे है उन्हें आवेदन करने का अधिकार नहीं होगा। तीसरा बड़ा कारण प्रशासनिक तबादलें होंगे जिसमें राजनीति और जनप्रतिनिधियों का अपना दखल होगा।

- नीति के अनुसार 15 जून तक होंगे शिक्षकों के तबादले...
जो पॉलिसी सामने आई उसके अनुसार 8 जून से 15 जून के मध्य तबादले होंगे। प्रभारी मंत्री की अनुशंसा पर तबादले किए जाएंगे। वहीं जिला, संभाग और राज्य काडर के तबादले 8 से 17 जून तक शिक्षा मंत्री की अनुशंसा पर होंगे। स्वैच्छिक तबादले के लिए पोर्टल पर रिक्त पद 18 जून को अपडेट किए जाएंगे। इसके लिए ऑनलाईन आवेदन 19 से 23 जून तक किए जा सकेंगे। 

- शिक्षकों में नाराजगी पर संगठन विरोध नहीं कर रहे...
इस तरह की तबादला नीति को लेकर शिक्षकों में नाराजगी देखी जा रही है। वहीं दूसरी ओर शिक्षक संगठन इस मामले में चुप्पी साधे बैठे है वे विरोध दर्ज कराने सामने नहीं आ रहे है। शिक्षकों का कहना है कि शिक्षकों के अलग-अलग दर्जनों संगठन है, लेकिन कोई भी इस मामले में नोटिस नहीं ले रहा है। उनका कहना है कि तबादला नीति के नाम पर शिक्षकों का एक तरह से शोषण ही होगा।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 08 जून 2026