बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। बैतूल में सरकारी निर्माण कार्यो में ठेकेदार द्वारा भू-जल का ही उपयोग किया जाता है और यह उपयोग बिना सेन्ट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की अनुमति के ही किया जाता है, कई बार तो देखने में आता है कि ठेकेदार संबंधित विभाग के पेयजल के उपयोग में आने वाले बोर से ही पानी लेकर निर्माण में उपयोग करता है। विभाग के अधिकारियों के संज्ञान में सबकुछ होने के बावजूद भी इस तरह के नियम विरूद्ध कार्य रोकने की कोई पहल नहीं होती है। बैतूल में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कोई कार्यालय नहीं है और छिंदवाड़ा से बैतूल के मामले को डील किया जाता है इसलिए खुली मनमानी चलती हुई दिखाई देती है। वर्तमान में सीसीएफ कार्यालय परिसर में करीब 70 लाख रूपए की लागत से बैतूल परिक्षेत्र अधिकारी द्वारा सीसीएफ कार्यालय का निर्माण कराया जा रहा है। करीब दो हजार वर्गफूट से ज्यादा में बन रही इस बिल्डिंग में सीसीएफ कार्यालय परिसर क्षेत्र में पेयजल सप्लाई के बोर से ही ठेकेदार निर्माण में पानी का उपयोग कर रहा है। ठेकेदार के पास सेन्ट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की कोई अनुमति नहीं है। इसके बावजूद उसके द्वारा पानी का उपयोग किया जा रहा है। जबकि कायदे से उसे अधिकृत टैंकर से पानी लेना चाहिए या फिर जल संसाधन विभाग से अनुबंध कर वहां राशि जमा कर पानी किसी निकटतम डेम से उठाना चाहिए, लेकिन ठेकेदार ऐसा नहीं कर रहा है। वह तो विभाग के ही बोर का पानी उपयोग कर रहा है जो कि एक तरह की चोरी की श्रेणी में ही आएगा। उसे रोकने की जिम्मेदार बैतूल रेंजर की है, लेकिन वे ध्यान ही नहीं दे रहे है। ठेकेदार अपना पैसा बचाने के लिए नियम विरूद्ध काम कर रहा है और ऐसी जगह कर रहा है जहां बैतूल एसडीओ, बैतूल सामान्य उत्तर वन मंडल डीएफओ और सीसीएफ का भी कार्यालय है। 

- जिले में हर निर्माण प्रोजेक्ट में यही हाल...
जो भी निर्माण कार्य होता है उसमें यही होता है। चाहे वह जिला अस्पताल में होने वाले निर्माण हो या जिला पंचायत के पीछे बनने वाला हॉस्टल हो या फिर नया तहसील भवन हो या फिर उद्योग विभाग का भवन हो हर जगह भू-जल का उपयोग हुआ है।
 नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 13 जून 2026