बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। सीसीएफ कार्यालय परिसर में जो नया सीसीएफ कार्यालय भवन बनाया जा रहा है उसमें तमाम तकनीकी मापदंड ताक पर रख दिए गए है? इन मापदंडों को लेकर किसी भी स्तर पर मॉनीटरिंग का कोई सिस्टम ही नहीं है, इसलिए ठेकेदार को खुली मनमानी का मौका मिल रहा है। यहां पर नियमित रूप से कोई इंजीनियर निरीक्षण ही नहीं करता है, क्योंकि वन विभाग में कोई इंजीनियर है नहीं है और वन विभाग स्वयं इसमें निर्माण एजेंसी है। इस स्थिति में निर्माण के साथ जो एमबी (मेजरमेंट बुक) भरी जाती है वह भी रेंजर ही भर रहे है? अब सवाल यह है कि रेंजर ने इंजीयरिंग का कौनसा डिप्लोमा या डिग्री ले रखी है जो ले आउट से लेकर एमबी बुक तक भरने का काम कर रहे है? इस निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच हो तो यह साफ हो जाएगा कि ठेकेदार तकनीकी मापदंड को ताक पर रखकर निर्माण कार्य कर रहा है। 

- जो लोहा उपयोग किया जा रहा है अप्रूव्ड कंपनी का नहीं है...
निर्माण कार्य में एसओआर पीडब्ल्यूडी का पालन किया जा रहा है, लेकिन यहां पर जो लोहा उपयोग किया जा रहा है वह पीडब्ल्यूडी के अनुसार अप्रूव्ड कंपनी का नहीं है। यही अपने आप में बताता है कि ठेकेदार मटेरियल क्वालिटी से किस कदर समझौता कर रहा है। दावा तो यह किया जाता है कि पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर को समय-समय पर निरीक्षण के लिए बुलाते है, लेकिन जिस तरह का लोहा उपयोग हो रहा है उससे साफ नजर आ रहा है कि निरीक्षण केवल औपचारिक है। 

- नियम अनुसार मौेके पर लैब तक नहीं बनाई गई...
इस तरह के निर्माण कार्य के लिए ठेकेदार को मौके पर लैब बनाना चाहिए, लेकिन देखने में यह आ रहा है कि ठेकेदार ने मौके पर कोई लैब ही नहीं बनाई है। इससे मटेरियल क्वालिटी को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है। क्योंकि वन विभाग में कोई तकनीकी अधिकारी है नहीं इसलिए मनमानी चल रही है। 

- एम-20 मटेरियल नहीं...
यहां पर जो कांक्रीट रेसो है वह एम-20 क्वालिटी का नहीं है, यहां कोई देखने सुनने वाला है नहीं? इसलिए ठेकेदार अपने हिसाब से कांक्रीट बना रहा है। इससे इस बिल्डिंग का भविष्य अभी से अंधकारमय नजर आ रहा है।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 14 जून 2026