(बैतूल) एरिया ऑफिसर एप से पंचायतों में धांधली और भ्रष्टाचार की असली वजह का खुलासा , - आईएएस अमनबीर सिंह बैस और अभिलाष मिश्र के कार्यकाल के बाद एप को गंभीरता से लेना किया बंद
बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। आए दिन मीडिया में पंचायतों में मनरेगा सहित अन्य योजनाओं में भ्रष्टाचार के मामले उछाले जाते है, जनसुनवाई जैसे विभिन्न फोरम पर हमेशा पंचायतों को लेकर शिकायतें सामने आती है? इन शिकायतों में बताया जाता है कि किस तरह से निर्माण में धांधली हो रही है या भ्रष्टाचार हो रहा है? जिस तरह से पंचायतों में धांधली और भ्रष्टाचार के मामले सामने आते है उससे एक बात स्पष्ट है कि जो जिम्मेदार है वे अपनी भूमिका का सही निर्वहन नहीं कर रहे है। इस बात का खुलासा एरिया आफिसर एप से भी होती है, यह एप बताता है कि कलेक्टर से लेकर जनपद पंचायत के परियोजना अधिकारी तक अपना काम ठीक से नहीं कर रहे है। यह एप इस बात की गवाही देता है कि इनके लिए हर माह जितने कामों का निरीक्षण अनिवार्य है वह भी इनके द्वारा नहीं किया जा रहा है और इसलिए पंचायतों में यह पता है कि कोई देखने नहीं आता है तो खुली धांधली और भ्रष्टाचार सामने आता है। केन्द्र सरकार ने इसलिए मनरेगा से कलेक्टर जैसे अधिकारी को एक अलग से वाहन उपलब्ध कराया है, इसके बावजूद निरीक्षण ना होना बताता है कि इसमें अधिकारियों की रूचि नहीं है? पूर्व कलेक्टर नरेन्द्र सूर्यवंशी के समय से ही यह स्थिति देखने में आ रही है। अमनबीर सिंह बैस और अभिलाष मिश्रा के समय नियमित रूप से एप पर रिपोर्टिंग होती थी।
- तीन माह में मात्र 14 निर्माण कार्यो का जिम्मेदारों ने किया निरीक्षण...
एरिया ऑफिसर एप में यह स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि बैतूल जिले में मार्च, अप्रैल और मई माह में कलेक्टर से लेकर जिला पंचायत सीईओ, जनपद सीईओ, जिला पंचायत परियोजना अधिकारी, जनपद पंचायत परियोजना अधिकारी ने अपने शेड्यूल और टारगेट के अनुसार निर्माण कार्यो का निरीक्षण नहंी किया? कुल 14 निरीक्षण सामने आए, वहीं इस माह जून में आठनेर और चिचोली के दो-दो निरीक्षण एप बता रहा है वह भी ब्लॉक स्तर के आफिसर द्वारा। जबकि कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ और जनपद सीईओ के एक भी निरीक्षण सामने नहीं आए।
- यह है एरिया ऑफिसर एप और उसके आधार पर निरीक्षण का फार्मूला...
केन्द्र शासन ने मनरेगा में विधिवत निरीक्षण और उसकी मॉनीटरिंग के लिए एक एप बनाया है जिसे एरिया ऑफिसर एप नाम दिया गया, इस एप में कलेक्टर से लेकर जनपद सीईओ तक के लिए प्रत्येक माह निरीक्षण के टारगेट दिए गए। इसमें निरीक्षण के साथ संबंधित अधिकारी को अपने मोबाईल से उस निर्माण कार्य की जिओ टेग फोटो डालनी होती है, इसके बिना निरीक्षण नहीं माना जाता है।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 18 जून 2026


संतों की वाणी से बेहतर जीवन का मार्ग प्रशस्त होता है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
बुलडोजर कार्रवाई पर बयान पड़ा भारी, अभिषेक बनर्जी के खिलाफ केस दर्ज
असम में बाढ़ का कहर, 50 लोगों की मौत; 40 अब भी लापता, हालात बेहद गंभीर
मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, इराक में धमाके और वेस्ट बैंक में खूनी संघर्ष