आध्यात्मिक जागृति द्वारा आदिवासी समाज का सशक्तिकरण नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की आध्यात्मिकता से हमे सशक्त होने की है आवश्यकता - हेमंत चंद्र दुबे बबलू
क्या इस विषय पर आदिवासी समाज को जागृत करने की आवश्यकता है या उनसे इस विषय पर सीखने और समझने की आवश्यकता है। जिस आध्यात्मिक जागृति की बात की जा रही है वह तो आदिवासी समाज की जीवन शैली है। प्रकृति पूजक उस समाज को। हम क्या पर्यावरण संरक्षण प्रकृति संरक्षण के बारे में बता पाएंगे बल्कि वास्तविकता तो यह है कि हमें उनसे पर्यावरण संरक्षण प्रकृति के बारे में ज्ञान अर्जित करना चाहिए।
क्या शबरी के झूठे बेर खाने वाला प्रसंग हम सभी के लिए आध्यात्मिक जागृति का अनुपम उदाहरण नहीं की प्रभु के चरणों की तपस्या ऐसी की प्रभु ने शबरी के झूठे बेर खाने में भी संकोच नहीं किया ।हम हमेशा भजनो में कहते और गाते है कि कौन कहता है भगवान खाते नहीं तुम शबरी के जैसे बेर खिलाते नहीं लेकिन शबरी के जैसे बेर न तो हम खाते है और न ही खिलाते है, हम पानी पीने में डिस्पोजल गिलास का केवल इसलिए उपयोग करने लगे कि किसी के झूठे गिलास का पानी हम कैसे पियेंगे ? शबरी के बेर तो बहुत दूर की बात है।शबरी ने प्रभु को झूठे बेर खिलाकर और प्रभु ने शबरी के झूठे बेर खाकर यही समझाया कि स्नेह ,प्यार, भक्ति और प्रभु की बनाई इस सृष्टि में कोई छूत अछूत नहीं है सब मेरी ही संताने है। यह सुंदर बात हमारी आदिवासी समाज की बेटी शबरी ने हजारों वर्ष पूर्व इस सभ्यता को सिखाई दो थी अब हम उसे आध्यात्मिक जागृति से जगा रहे है,जिस समाज से हमें प्रेरणा लेना चाहिए थी क्या उस समाज को हमे आध्यात्मिक जागृति से सशक्त करने की आवश्यकता है या फिर उस समाज की आध्यात्मिक चेतना को हमे समझकर आध्यात्मिक जागृति से सशक्त होने की आवश्यकता है। आध्यात्मिक चेतना का संचार होता तो तब होता जब अयोध्या में राम मंदिर में रामलला की प्रतिस्थापना शबरी के समाज की बेटी महामहिम राष्ट्रपति के हाथों से संपन्न होती । हजारों वर्षों के बाद प्रभु राम को भी लगता कि त्रेतायुग युग से कलियुग तक कुछ नहीं बदला आज भी शबरी का सम्मान कायम है, लेकिन हम उस समाज को आध्यात्मिक सम्मान न देकर उसे आध्यामिक जागृति के माध्यम से सशक्त करने का प्रयास और सम्मेलन करने लगे।एकलव्य के समर्पण को कौन भुला सकता हैं, गुरु के चरणों में सर्वोच्च समर्पण। वैसा समर्पण का अनुपम उदाहरण आज तक दुनिया में नहीं देखने को सुनने को मिला क्या आज इस मंच से यह घोषणा नहीं की जा सकती थी कि गुरु पूर्णिमा अब एकलव्य जयंती के रूप में पूरे देश में मनायी जाएगी और यह कार्य यदि होता तो हम कह सकते थे कि आध्यात्मिक जागृति से आदिवासी समाज का सशक्तिकरण करने की दिशा में पहल की गई है। वास्तव में आध्यात्मिक जागृति से आदिवासी समाज सदियों से ओत प्रोत रहा हैं लेकिन आधुनिक युग में वह समाज राजनीतिक रूप से कमजोर है जिसे आगे बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य करने की आवश्यकता है और उसी दिशा में राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद पर आदिवासी समाज की बेटी को विराजित होने का अवसर मिला यह कार्य वास्तव में हम सभी के लिए गौरव और गर्व करने का विषय है। आज मंचो से भाषण हुए उसका सार भी यही था ।विषय होना चाहिए था *राजनैतिक जागृति से आदिवासी समाज का सशक्तिकरण* विषय ज़्यादा प्रासंगिक और समयानुकूल होता क्योंकि आध्यामिक जागृति से आदिवासी समाज से हमें सशक्त होने की आवश्यकता है न कि आदिवासी समाज को हमे आध्यामिक जागृति से सशक्त और समझाने की आवश्यकता है। हमारे सांसद महोदय के आध्यामिक ज्ञान के आगे कौन टिक सकता हैं वास्तव में उनका अध्यात्म का ज्ञान, अलौकिक है अथाह आध्यात्मिक ज्ञान से हम उन्हें कैसे आध्यात्मिक जागृति से सशक्त कर सकते है बल्कि उनके आध्यात्मिक ज्ञान से तो हमे जागृत होने की आवश्यकता है।
राष्ट्रपति महोदया दौपर्द्री मुर्मू जी बैतूल की धरती पर पधारी ऐतिहाशिक पल है किन्तु काश वे आदिवासी विश्वविधालय के उद्घाटन समारोह में उपस्थित होतीं , काश वे आदिवासी स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की आधारशिला रखने बैतूल आती, काश वे आदिवासी कला संस्कृति के संग्रहालय को राष्ट्र को समर्पित करने बैतूल आती, काश वे बैतूल में वनों उपलब्ध जड़ी बूटियों के वैज्ञानिक शोध पर आधारित संस्थान को खोलने के लिए आती हैं ताकि कैंसर को जड़ से खत्म करने का वैज्ञानिक आधार मिल पाता, वे आती बैतूल के स्वतंत्रता संग्राम के उस बलिदानी इतिहास को सजोने जिसके इतिहास के पन्ने आदिवासी शहीद वीर क्रांतिकारियों के खून कि स्याही से लिखे गए हैं, वे आती बैतूल में आयुध कारखाने की आधार शिला रखने क्योंकि वे ही तो देश की सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर हैं।
लेकिन ऐसा कुछ भी संभव नहीं हुआ ।
इस सबके बावजूद बैतूल की धरा पर राष्ट्रपति महोदया का आगमन बैतूल के इतिहास में अपनी स्वर्णिम इबारत लिख गया, हमे स्वर्णिम पल उपलब्ध करवा गया। ब्रह्माकुमारी दीदीयों के कदमों में सादर नमन है जिनके अथक प्रयासों से यह स्वर्णिम पल हम बैतूल के नागरिक देख पाएं।


पीवी सिंधू की वापसी की कहानी में विराट कोहली का खास रोल, पति का बड़ा बयान
संसद भवन में NDA की अहम बैठक, पीएम मोदी और नए सांसदों पर रहेगा फोकस
तोड़फोड़ करने वालों की बढ़ी मुश्किलें, CJP प्रदर्शन मामले में दर्ज हुईं पांच FIR
विराट-रोहित का उदाहरण देकर अश्विन ने उठाई गेंदबाजों की आवाज, शमी और सिराज पर कही बड़ी बात