बैतूल(हेडलाइन)/ नवल वर्मा। भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु आ तो ब्रम्हकुमारीज के कार्यक्रम में आ रही थी, लेकिन राष्ट्रपति के आयोजन की गरिमा और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तमाम जिम्मेदारी प्रशासन की थी। इसमें बैतूल प्रशासन खरा उतरा है। राष्ट्रपति के बैतूल प्रवास को लाजवाब बनाने में बैतूल कलेक्टर डॉ सौरभ संजय सोनवणे, एसपी वीरेन्द्र जैन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी से लेकर निचले स्तर के कर्मचारियों तक ने अथक मेहनत की है और इस सफल आयोजन के बाद आम जनता भी इन्हें बधाई का पात्र मानती है। 
भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के बैतूल आगमन पर हेलीपेड परिसर में उनका गरिमामय एवं आत्मीय स्वागत किया गया। आगमन पर मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई   हेमंत खंडेलवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु का आत्मीय अभिनंदन किया। प्रोटोकॉल के अनुसार अपर मुख्य सचिव संजय शुक्ला, एसडीजी रवि गुप्ता, कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे तथा पुलिस अधीक्षक वीरेन्द्र जैन ने राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु का स्वागत कर उनका अभिवादन किया।
महामहिम राष्ट्रपति के बैतूल जिले में प्रथम आगमन पर आकर्षक लोक नृत्य की प्रस्तुति कर स्वागत किया गया                                             
 भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का गुरुवार को बैतूल जिले में प्रथम आगमन हुआ। राष्ट्रपति ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा आयोजित  ‘आध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज का सशक्तिकरण’ महासम्मेलन में शामिल हुई। राष्ट्रपति के प्रथम नगर आगमन पर कार्यक्रम स्थल पर गोंडी जनजातीय कड़पड़ा दल के कलाकारों ने परंपरागत लोक नृत्य की प्रस्तुति कर राष्ट्रपति का स्वागत किया।
राष्ट्रपति का विधायक गणों ने पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया                                          
 राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ब्रह्माकुमारी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम पहुंची। उनके आगमन अवसर पर घोड़ाडोंगरी विधायक श्रीमती गंगा उईके, भैंसदेही विधायकमहेंद्र सिंह चौहान, मुलताई विधायक चंद्रशेखर देशमुख, आमला विधायक डॉ.योगेश पंडाग्रे ने पुष्प गुच्छ भेंट कर राष्ट्रपति का स्वागत किया।
राष्ट्रपति ने रुद्राक्ष का पौधा रोपित कर पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश                                       
महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को कार्यक्रम स्थल लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में धार्मिक पवित्रता का प्रतीक एवं औषधीय गुणों से भरपूर रुद्राक्ष का पौधा रोपित कर देशवासियों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर महामहिम राज्यपाल श्री मंगु भाई पटेल, केंद्रीय राज्य मंत्री जनजातीय कार्य विभाग श्री दुर्गादास उइके, प्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री श्री नरेंद्र शिवाजी पटेल उपस्थित थे।
राष्ट्रपति ब्रह्मकुमारी संस्था के सदस्यों के साथ फोटो सेशन में शामिल हुई                                          
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने ब्रह्माकुमारी संस्था के सदस्यों के साथ सामूहिक फोटो सेशन में शामिल हुई। इस अवसर पर महामहिम राज्यपाल श्री मंगू भाई पटेल, केंद्रीय राज्य मंत्री जनजातीय कार्य विभाग दुर्गादास उइके, प्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल उपस्थित थे।
महामहिम राष्ट्रपति ने जनजातीय महिलाओं के द्वारा बनाए गए उत्पादों की प्रशंसा भी की
 भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने मध्य प्रदेश भ्रमण के दौरान गुरुवार को बैतूल जिले के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में आयोजित  ‘आध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज का सशक्तिकरण’ महासम्मेलन के दौरान लगाई गई प्रदर्शनी/स्टॉल का अवलोकन किया। अवलोकन के दौरान मध्य प्रदेश के राज्यपाल श्री मंगू भाई पटेल, केन्द्रीय राज्य मंत्री जनजातीय कार्य विभाग दुर्गादास उईके, प्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल उपस्थित रहे। महामहिम राष्ट्रपति ने महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बैतूल जिले में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की, इस दौरान उन्होंने जनजातीय समुदाय की महिलाओं के द्वारा निर्मित किये जा रहे पारंपरिक विभिन्न उत्पादों की प्रशंसा की। बैतूल जिले की स्व सहायता समूह की महिलाएं सतपुडांचल प्रोड्यूसर कंपनी के माध्यम से रागी, कोदो, कुटकी ज्वार एवं बाजरा जैसे पोषक तत्वों से भरपूर मिलेटस से कुकीज, पास्ता, नूडल्स, इंस्टेंट इडली दोसा, मिक्स दलिया तथा अन्य स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों का निर्माण कर रही है। राष्ट्रपति ने सभी महिलाओं की भरपूर सराहना की। उल्लेखनीय है कि सतपुडांचल प्रोड्यूसर कंपनी में 175 स्व सहायता समूह के 2075 समूह सदस्य जुड़े हैं, साथ जुडक़र सदस्य विभिन्न प्रकार की गतिविधियों का संचालन कर प्रतिमाह 8 से 10 हजार रुपए की अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। राष्ट्रपति ने वोकल फॉर लोकल, लखपति दीदी एवं आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में समूह द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।  
राष्ट्रपति ने महिलाओं के प्रयासों को रेखांकित करते हुए कहा की इन प्रयासों से महिलाओं की आय में वृद्धि हो रही है और वह स्वावलंबी बन रही है तथा भारत को आत्मनिर्भर बनाने में अपनी महती जिम्मेदारी निभा रही हैं। राष्ट्रपति ने भरेवा शिल्प कला के स्टॉल का भी अवलोकन किया। जनजातीय महिलाओं द्वारा पीतल, तांबा, कांसा आदि से निर्मित विशिष्ट धातु शिल्प कृतियों को प्रदर्शित किया गया था। इस स्टाल में महामहिम राष्ट्रपति ने जनजातीय समूह की महिलाओं की भरेवा शिल्प कला जिसे ढोकरा कला के नाम से भी जाना जाता है की प्रशंसा की। श्री बलदेव बाघमारे ने राष्ट्रपति को पीतल से निर्मित जनजातीय महिला की प्रतिमा भेंट की। राष्?ट्रपति ने इस दौरान वन आधारित उत्पादों के स्टॉल का भी अवलोकन किया, स्टॉल में मुख्य रूप से नांदा फॉरेस्ट हनी, बैतूल सागौन और कुकरु कॉफी के माध्यम से आजीविका उद्यमिता एवं वोकल फॉर लोकल की भावना को सशक्त रूप में प्रदर्शित किया गया था। इन प्रोडक्ट के जरिए जनजातीय समुदाय के परिवारों को सम्मान जनक आजीविका प्राप्त हो रही है। राष्ट्रपति ने विशेष रूप से श्री अन्न से बने व्यंजनों की पोषण प्रदर्शनी का भी निरीक्षण किया। इस प्रदर्शनी में 18 प्रकार के पौष्टिक व्यंजन प्रदर्शित किए गए थे। राष्ट्रपति ने गौशालाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों का भी अवलोकन किया। राष्ट्रपति ने अन्य स्टॉल पर भी पहुंचकर विभिन्न प्रोडक्ट को देखा और सभी को निरंतर आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया।
आध्यात्मिक जागृति जनजातीय समाज के सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम : राज्यपाल श्री पटेल
   राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि आध्यात्मिक चेतना और धार्मिक मूल्यों के माध्यम से समाज को उन्नत, संस्कारित एवं सम्मानपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने इस भव्य एवं प्रेरणादायी आयोजन के लिए प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय का आभार व्यक्त करते हुए संस्था के सभी भाई-बहनों को शुभकामनाएं दीं। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि उनका प्रजापिता ब्रह्माकुमारी संस्था से वर्ष 1995 से आत्मीय जुड़ाव रहा है। नवसारी में उनके निवास के सामने स्थित ब्रह्माकुमारी केंद्र से लेकर माउंट आबू, गांधीनगर सहित विभिन्न स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में उन्हें सहभागी बनने का अवसर प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि संस्था द्वारा आध्यात्मिक जागरण के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य सराहनीय एवं अनुकरणीय है।  राज्यपाल श्री पटेल ने व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर कहा कि प्रतिदिन कुछ समय ध्यान एवं मेडिटेशन के लिए निकालने से मन को शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मिक संतुलन प्राप्त होता है। ऐसे आध्यात्मिक अभ्यास व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और सद्भाव का संचार करते हैं तथा समाज को भी सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं।
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु का जीवन संघर्ष और कर्तव्यनिष्ठा  का अनुपम उदाहरण: केंद्रीय मंत्री श्री उइके
 केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उईके ने कहा कि ओडिशा के एक छोटे से जनजातीय गांव से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने वाली राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु भारतीय लोकतंत्र की शक्ति, संविधान की महानता और सामाजिक समरसता की जीवंत मिसाल हैं। केंद्रीय मंत्री श्री उइके ने कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु का जीवन संघर्ष, समर्पण, सेवा और कर्तव्यनिष्ठा का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने अपनी कर्मठता, धैर्य और समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के बल पर न केवल सर्वोच्च संवैधानिक पद को सुशोभित किया है, अपितु देश की प्रत्येक बेटी, जनजातीय समाज और आम नागरिक के लिए प्रेरणास्रोत बनी हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के बैतूल आगमन से जिले का प्रत्येक जनजातीय परिवार स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा है। उनका नेतृत्व सामाजिक न्याय, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा और राष्ट्र निर्माण के प्रति सभी को प्रेरित करता है। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के आगमन पर अनहद संगीत महाविद्यालय बैतूल की 7 सदस्यीय कलाकारों द्वारा आकर्षक और मनमोहक स्वागत नृत्य की प्रस्तुति दी गई।
जनप्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मु को हेलीपैड पर दी आत्मीय विदाई 
राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मु एवं राज्यपाल मंगू भाई पटेल को बैतूल के हेलीपैड पर आत्मीय विदाई दी गई। हेलीपैड पर केंद्रीय जनजाति कार्य मंत्री  डीडी उईके, जिले के प्रभारी एवं लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल, एसीएस संजय शुक्ला, कलेक्टर डॉ.सौरभ संजय सोनवणे एवं पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन ने राष्ट्रपति को आत्मीय विदाई दी।
विकास और संस्कृति का संतुलन ही सशक्त और समृद्ध समाज की आधारशिला : राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि समाज का सशक्तिकरण केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं होना चाहिए। वास्तविक सशक्तिकरण तब होता है जब व्यक्ति में आत्मविश्वास, आत्मसम्मान, जागरूकता और दायित्वबोध का विकास हो। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि जनजातीय समाज आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने वाला समाज है और उसकी यही विशेषता उसे विशिष्ट बनाती है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक जागृति व्यक्ति को अपनी आंतरिक शक्ति का अनुभव कराती है तथा सकारात्मक सोच को जीवन के उच्च आदर्शों से जोड़ती है। विकास और संस्कृति का संतुलन ही किसी भी सशक्त और समृद्ध समाज की आधारशिला होता है।
 राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु बैतूल में आयोजित  ‘आध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज का सशक्तिकरण’ महासम्मेलन को संबोधित कर रही थी। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि भारत ने वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य की प्राप्ति तभी संभव है जब देश का कोई भी वर्ग विकास की मुख्यधारा से पीछे न रह जाए। हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक भारत की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत सुरक्षित और अक्षुण्ण रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज को भ्रमित करने के प्रयास भी समय-समय पर किए जाते हैं, ऐसे में ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा आयोजित इस प्रकार के सम्मेलन जनजातीय समाज के आध्यात्मिक उत्थान, सामाजिक जागरूकता और समग्र विकास के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने मध्यप्रदेश शासन की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य तथा जनजातीय कल्याण के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने विशेष रूप से सिकल सेल एनीमिया का उल्लेख करते हुए कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में इस बीमारी की संभावना अधिक पाई जाती है और इसके उन्मूलन के लिए प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन प्रयासों से जनजातीय समाज का स्वास्थ्य स्तर और बेहतर होगा।
  राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि मध्यप्रदेश का बैतूल जिला अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक चेतना के लिए पूरे देश में विशेष पहचान रखता है। यहां के जनजातीय समुदायों ने अपनी परंपराओं, लोकज्ञान और सांस्कृतिक मूल्यों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित रखा है। सामूहिकता, सहयोग, सरलता, ईमानदारी और आध्यात्मिकता जैसे उच्च जीवन मूल्यों का जीवंत स्वरूप बैतूल की जनजातीय संस्कृति में दिखाई देता है।
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण के लक्ष्य पर केंद्रित इस महासम्मेलन में शामिल होकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने इस महत्वपूर्ण पहल के लिए ब्रह्माकुमारी संस्थान को बधाई देते हुए कहा कि यह आयोजन केवल बैतूल या मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश और समाज के लिए विशेष महत्व रखता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महासम्मेलन में तैयार होने वाली कार्ययोजनाएं जनजातीय समाज को राष्ट्र की प्रगति का सशक्त भागीदार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।  राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्थान ने मातृशक्ति को केंद्र में रखकर अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया है। संस्थान की आंतरिक शुचिता, मानवीय गरिमा, सेवा भावना तथा प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता समाज के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी दुनिया में आंतरिक शुचिता और आध्यात्मिक मूल्यों का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। इन्हीं मूल्यों के आधार पर समाज में समतापरक आचरण, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की भावना विकसित होती है। वर्तमान समय में जब विश्व तनाव, संघर्ष और युद्ध जैसी परिस्थितियों का सामना कर रहा है, तब ऐसे आयोजनों की आवश्यकता और भी अधिक बढ़ जाती है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि जनजातीय समुदाय की जीवनशैली स्वाभाविक रूप से आध्यात्मिक मूल्यों और प्रकृति के निकट रही है। जनजातीय समाज, जिसे आदिवासी समाज भी कहा जाता है, सृष्टि के आरंभ से ही धरती के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीता आया है। यह समाज सुख, शांति, आनंद और प्रेम के साथ जीवन जीना जानता है तथा हिंसा से दूर रहता है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज प्रकृति ही नहीं, बल्कि पंचतत्वों—धरती, आकाश, वायु, जल, सूर्य और चंद्रमा—को पूजनीय मानता है। इनके लिए किसी विशेष मंदिर या पूजा स्थल की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि पूरी प्रकृति ही उनके लिए आराधना का केंद्र है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि धरती, जल और वायु के बिना मानव जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। जनजातीय समाज प्रकृति को नुकसान पहुंचाने के बजाय उसका संरक्षण करता है। वे धरती को क्षति नहीं पहुंचाते, जल स्रोतों को प्रदूषित नहीं करते और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग भी आवश्यकता के अनुसार करते हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज किसी भी संसाधन के उपयोग से पहले प्रकृति को नमन करता है। यही कारण है कि उनकी जीवनशैली पर्यावरण संरक्षण का श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत करती है। आज जब पेड़-पौधों, नदियों और समुद्रों के संरक्षण की आवश्यकता पूरी दुनिया महसूस कर रही है, तब जनजातीय समाज की जीवन पद्धति मानवता के लिए मार्गदर्शक बन सकती है।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 18 जून 2026