(बैतूल) सिर्फ फाईलों और मीडिया की सुर्खियों तक सीमित खनिज उत्खनन का मामला , - ना यूरेनियम का खनन, ना ग्रेफाईट का उत्पादन और ना ही मिथेन गैस निकाली जा रही
बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। अक्सर यह सुर्खियां बनती है कि आमला में तांबा मिल गया है, शाहपुर में यूरेनियम मिल गया है, बैतूल में ग्रेफाईट भारी मात्रा में है और पिछले दो वर्ष से तो शाहपुर, घोड़ाडोंगरी क्षेत्र में भारी मात्रा में मिथेन गैस मिलने का मामला भी हर तरफ छाया रहा, लेकिन देखने में यह आ रहा है कि इनका उत्पादन, खनन होने का कोई मामला सामने ही नहीं आया है। मिथेन गैस के मामले में भोपाल में हुई कॉन्क्लेव में सबसे पहले चर्चा शुरू हुई थी और यहां पर गैस निकालने का ठेका नोएडा की इन्वेनायर पेट्रोडायन नामक कंपनी को दिया गया था। बताया गया था कि 2021 में यहां सर्वे के दौरान भारी मात्रा में बैतूल और छिंदवाड़ा की सीमा पर मिथेन गैस का भंडार मिला है। जिसमें अकेले बैतूल जिले में 37 हजार हेक्टेयर में मिथेन निकाले जाने का दावा किया गया था? खनिज विभाग के अनुसार तो पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय भारत सरकार द्वारा 1771 वर्ग किलोमीटर में इन्वेनायर पेट्रोडायन नोएडा के लिए पेट्रोलियम एक्सप्लोरेशन का लाईसेंस जारी किया गया। करीब 5 हजार करोड़ का यहां निवेश होने की बात कही गई थी। अब पिछले दो वर्ष में उत्पादन को लेकर जो दावे किए जा रहे थे वे हकीकत में जमीन पर नजर ही नहीं आ रहे है। शाहपुर और घोड़ाडोंगरी में संबंधित कंपनी की कोई भी हलचल दिखाई नहीं दे रही है।
- यूरेनियम को लेकर दिखाए गए थे हसीन ख्वाब...
वर्ष 2017-18 में यह सामने आया था कि शाहपुर ब्लॉक के बाद घोड़ाडोंगरी में भी भारी मात्रा में दुर्लभ खनिज यूरेनियम की मौजूदगी मिली है। परमाणु खनिज अनवेषण एवं अनुसंधान निर्देशालय के माध्यम से मार्च-अप्रैल 2018 में हेलीकाप्टर की मदद से यूरेनियम की खोज पूरी कर ली गई है। उस समय की जो मीडिया रिपोर्ट है उसके अनुसार करीब ढाई हजार एकड़ में जमीन के भीतर यूरेनियम की मौजूदगी है और यह उम्मीद से कहीं ज्यादा है। इसके भी एक वर्ष पहले शाहपुर ब्लॉक में 2016 में करीब 989 हेक्टेयर में यूरेनियम पाए जाने का मामला सामने आया था। यह सब होने के बाद मामला इन खबरों के आगे बढ़ा ही नहीं।
- पांच वर्ष में भी ग्रेफाईट खनन का मामला फाईलों से बाहर आकर जमीन पर दिखाई ही नहीं दिया...
बैतूल जिले में जिला मुख्यालय पर ही भारी मात्रा में ग्रेफाईट होने और उसके खनन के लिए कंपनियों के सक्रिय होने का मामला पिछले पांच वर्ष से लगातार सुर्खियों में है। बैतूल शहर से लगे चिखलाार, गौठान और गोलीघाट क्षेत्र में भारी मात्रा में ग्रेफाईट बताया गया। गौठान में जो ब्लॉक है वह 9 हेक्टेयर में है और रायपुर की जीयो रिसोर्स द्वारा यहां पर खनन के लिए लाईसेंस लेने और अन्य कार्रवाई किए जाने सामने आया था, लेकिन मामला कभी भी जमीनी धरातल पर नजर ही नहीं आया। भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार बैतूल में लगभग 11 मिलीयन मैट्रिक टन ग्रेफाईट का भंडारण होना पाया गया है। अब सवाल यह है कि पांच वर्ष में भी किन कारणों से ग्रेफाईट के खनन को लेकर धरातल पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? आखिर किस स्तर पर पूरा मामला अटका हुआ है?
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 06 जुलाई 2026


क्या खत्म होगा संसद का गतिरोध? NEET विवाद पर राहुल गांधी की बैठक से बढ़ी सियासी हलचल
(बैतूल) ठेका टर्मिनेट पर कपिल शर्मा का प्लांट रेस्टहाउस से नहीं हटवा रहा पीडब्ल्यूडी , - ठेेकेदार की बनाई दोनों व्हाईट टॉप सडक़ उपलब्धि की जगह आफत बन गई
CJP प्रदर्शन पर सरकार का रुख साफ, बोली- बातचीत के लिए हमेशा तैयार, 24 घंटे में दिए 4 प्रस्ताव
शिक्षा पर सरकारी खर्च का रिपोर्ट कार्ड, मोदी सरकार के 12 साल के आंकड़े क्या कहते हैं?