बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। सरकारी स्कूलों को शासन स्कूल की छोटी-बड़ी जरूरतों को पूरा करने के लिए फंड देता है जिसे आकस्मिक निधि कहा जाता है। इस निधि का सही उपयोग होता है या नहीं यह बड़ा सवाल है, लेकिन आरोप यह लगते है वित्तीय वर्ष के अंत में स्कूल के प्रधान पाठक बिल व्हाउचर लगाकर पैसा निकाल लेते है, लेकिन जिस जरूरत के लिए यह पैसा दिया जाता है वह जरूरत ही पूरी नहीं होती है।
 इस निधि का उपयोग स्कूल में चाक, डस्टर, स्टेशनरी, झाडू, डस्टबीन जैसी छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए होना चाहिए, लेकिन ऐसा होता नहीं है। यही कारण है कि स्कूल में कक्षा सफाई करने के लिए झाडू तक उपलब्ध नहीं रहती है। शिक्षकों के उपयोग में होने वाले शौचालय की सफाई के लिए कभी फिनाईल आदि भी उपलब्ध नहीं रहता। यह जरूर होता है कि वित्तीय वर्ष के अंत में धड़ाधड़ बिल लगते है और फटाफट पैसा निकल जाता है। यह पैसा कहां जाता है यह बड़ा सवाल है? प्राथमिक स्तर की शालाओं के लिए प्रत्येक शाला को 12500 रूपए मिलते है। 

- चूडिय़ा स्कूल में कक्षा सफाई के लिए झाडू नहीं होने पर छात्र पेपर से हटा रहे है कचरा...
चूडिय़ा जो कि चिचोली से मात्र 6-7 किलोमीटर दूर है। यहां की शाला की स्थिति को उजागर करने के लिए एक आवेदन बीईओ चिचोली के पास पहुंचा था। इस आवेदन में बताया गया था कि चूडिय़ा की शाला में कक्षा में 10-12 दिन तक किसी स्तर पर कोई सफाई नहीं हुई छात्र कचरे में ही बैठते रहे। वजह यह थ कि यहां पर सफाई के लिए झाडू तक उपलब्ध नहीं थी। आवेदन में बीईओ से निवेदन किया गया कि वे प्रधान पाठिका को निर्देशित करें कि वे सफाई के लिए सामग्री उपलब्ध कराए। मार्च-2025-26 की जो 12500 रूपए की राशि है, उसमें से सामग्री खरीदवाई जाए जिससे कि छात्रों को झाडू लगाने के लिए पेपर और किताबों की मदद ना लेनी पड़े।

- शिक्षक की पत्नि के नाम की फर्म के लगे थे बिल...
गत वित्तीय वर्ष के अंत में भीमपुर में यह सामने आया था कि यहां पर एक शिक्षक की पत्नि के नाम वाली फर्म से ही अधिकांश स्कूलों में बिल लगे थे। इन बिलों पर भुगतान हुआ। मजेदार बात यह है कि जिस गांव या कस्बे में शिक्षक की पत्नि की दुकान या फर्म बताई जा रही थी उससे 70-70 किलोमीटर की शालाओं में खर्च के बिल यही से बनवाए गए। मामला सूर्खियों में भी आया, लेकिन बिना जांच के ही इसे दबा दिया गया।

- यह निधि ही अपने आप में एक बड़ा घोटाला...
शिक्षा विभाग को जानने समझने वालों का कहना है कि प्राथमिक, माध्यमिक , हाईस्कूल और हायर सेकेण्डरी स्कूलों को अलग-अलग राशि मिलती है। हाईस्कूल और हायर सेकेण्डरी स्कूल को 25 हजार रूपए मिलते है, लेकिन इस राशि का जिस तरह से आहरण होता है वह अपने आप में एक बड़ा जांच का विषय है। उनका कहना है कि हर वर्ष इस राशि को लेकर जांच हो तो बड़ा घोटाला सामने आएगा।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 08 जुलाई 2026