बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। प्रदेश के शासकीय स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति और कार्य व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने ई-अटेंडेंस प्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। शिक्षा आयुक्त के निर्देश पर अब सभी शिक्षकों के लिए स्कूल में न्यूनतम 5 घंटे की उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। इसके साथ ही शिक्षकों को स्कूल आने और स्कूल से जाने, दोनों समय शिक्षक एप के माध्यम से ऑनलाइन ई-अटेंडेंस दर्ज करनी होगी। यह उपस्थिति केवल स्कूल परिसर से 200 मीटर के दायरे में ही दर्ज हो सकेगी।
अब तक प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों को केवल स्कूल पहुंचने के समय ई-अटेंडेंस दर्ज करनी होती थी। लेकिन विभागीय निरीक्षण के दौरान कई बार ऐसे मामले सामने आए, जिनमें शिक्षक स्कूल में उपस्थित नहीं मिले, जबकि उनकी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज थी। ऐसे मामलों में जांच अधिकारियों द्वारा संबंधित शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव जिला शिक्षा अधिकारी को भेजा जाता था। इसके बावजूद ई-अटेंडेंस दर्ज होने के कारण संबंधित शिक्षकों को पूरे माह का वेतन मिल जाता था। इसी प्रकार की अनियमितताओं को रोकने और वास्तविक उपस्थिति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विभाग ने नई व्यवस्था लागू की है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि संबंधित संकुल प्राचार्यों ने शिक्षकों की ई-अटेंडेंस का सत्यापन किए बिना ही वेतन देयक तैयार कर ट्रेजरी भेज दिए। इसके आधार पर संबंधित शिक्षकों के खातों में वेतन जारी हो गया। अब विभाग यह पता लगा रहा है कि इस लापरवाही के लिए कौन-कौन अधिकारी जिम्मेदार हैं और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाए। शिक्षा विभाग का मानना है कि नई ई-अटेंडेंस व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसी अनियमितताओं पर प्रभावी अंकुश लगेगा। साथ ही शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित होगी, जिससे विद्यालयों में पढ़ाई का माहौल बेहतर होगा और छात्रों को निरंतर शिक्षण का लाभ मिल सकेगा। विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को नए निर्देशों का सख्ती से पालन कराने तथा ई-अटेंडेंस की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश भी जारी किए हैं।

- नई व्यवस्था होगी लागू...
नई व्यवस्था के अनुसार शिक्षक को विद्यालय पहुंचने के समय और विद्यालय से निकलने के समय दोनों बार शिक्षक एप के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करनी होगी। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिक्षक निर्धारित समय तक विद्यालय में मौजूद रहे या नहीं। विभाग का मानना है कि दो बार उपस्थिति दर्ज कराने से विद्यालयों में अनुशासन बढ़ेगा, शिक्षकों की जवाबदेही तय होगी और विद्यार्थियों को नियमित रूप से गुणवत्तापूर्ण शिक्षण मिल सकेगा। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि ई-अटेंडेंस केवल स्कूल से 200 मीटर की परिधि के भीतर ही दर्ज होगी। इससे किसी अन्य स्थान से उपस्थिति दर्ज कराने की संभावना समाप्त हो जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था तकनीक के माध्यम से निगरानी को मजबूत करेगी और उपस्थिति संबंधी विवादों में भी कमी आएगी।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 10 जुलाई 2026