बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा।  जब भी कोई बड़ा घटनाक्रम होता है और वह मामला मीडिया की सुर्खियां बनता है तो अचानक उस घटनाक्रम से जुड़े मामलों को लेकर प्रशासनिक सिस्टम त्वरित कार्यवाही से एक्शन मोड में आ जाता है। प्रशासनिक सिस्टम का यह एक्शन मोड तीन-चार दिन दिखाई देता है और फिर वह पूरा मामला ही ठंडे बस्ते में चला जाता है। कहने का मतलब यह है कि हेडलाईन बदलते ही प्रशासनिक सिस्टम भी किसी भी मामले को निर्णायक स्थिति तक पहुंचाए बगैर ही अपना मोड बदल देता है। पिछले दो-तीन वर्ष के ही मामलों को यदि देखा जाए तो यह साफ हो जाएगा कि किस तरह से अचानक अभियान शुरू होते है और फिर मीडिया की सुर्खियां बनने के बाद ठंडे बस्ते में चले जाते है। जबकि जिस मामले को लेकर यह अभियान शुरू होते है उनमें कहीं से कहीं तक कोई परिवर्तन या सुधार होता ही नहीं है। बैतूल शहर में भी ऐसे कई मामले देखने और सुनने में आए है, जिनमें ताबड़तोड़ तरीके से आदेश, निर्देश और जांच पड़ताल हुई, लेकिन परिणाम सदैव शून्य ही रहा, इसलिए इस तरह के अभियान या जांच की प्रक्रियाएं सामने आती है तो लोग समझ जाते है कि किस घटनाक्रम से प्रेरित यह औपचारिकताएं हो रही है।

- मामला : 01
- बेसमेंट की जांच हुई और फिर सब वैसा ही चल रहा है...
करीब दो वर्ष पहले दिल्ली में बेसमेंट में कोचिंग सेंटर में एक हादसा हुआ था उसके बाद बैतूल में भी बेसमेंट में होने वाली गतिविधियों को लेकर बड़े पैमाने पर जांच पड़ताल हुई। जांच पड़ताल के बाद कुछ व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में नोटिस दिए गए , लेकिन इन नोटिस के बाद उन बेसमेंट में वही सब गतिविधियां अभी भी चल रही है जो इन नोटिस या जांच पड़ताल के पहले हो रही थी। मतलब यह है कि जैसे ही लोगों के दिमाग से दिल्ली का हादसा उतरा वैसे ही इधर सिस्टम ने कार्रवाई बंद कर दी।

- मामला : 02
- कोचिंग सेंटर की जांच भी सिर्फ खानापूर्ति ही साबित हुई...
पटना के कोचिंग सेंटर में आगजनी के बाद बैतूल शहर में भी कोचिंग सेंटर को लेकर हल्ला मचने लगा, प्रशासन भी एक्शन मोड में आया और कुछ कोचिंग सेंटर तक प्रशासनिक टीम ने अपनी मौजूदगी भी दर्ज कराई। यह अभी हाल ही का मामला है, लेकिन सच्चाई यह है कि यह पूरी कवायद बमुश्किल तीन या चार दिन ही चर्चा में रही, इसके बाद कहीं कोई ठोस कार्रवाई या प्रक्रिया ना देखने में आ रही है और ना ही पढऩे में आ रही है। मतलब यह है कि यह मामला भी सिर्फ खानापूर्ति बनकर रह गया।

- मामला : 03
- पटाखे और बारूद के गोदामों की जांच की अब बात भी नहीं होती है...
जब हरदा में पटाखा फैक्ट्री में धमाका हुआ उसके बाद तो ऐसा लग रहा था कि सबकुछ सिस्टम से हो जाएगा। बैतूल में भी पटाखा गोदामों में एक्शन देखने में आया बारूद भी जब्त हुई। हेडलाईन बनी, लेकिन अब सिस्टम को नियम प्रक्रिया से जिस अंतराल में इन पटाखा या बारूद गोदाम का निरीक्षण करना चाहिए वैसा कुछ होता नहीं है और हो भी नहीं रहा है। हरदा हादसे के बाद भी कुछ और जगह इसी तरह के हादसे हुए तब थोड़ी बहुत जांच और निरीक्षण जैसी हलचल देखने में आई थी।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 13 जुलाई 2026