बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। लगभग एक सप्ताह से मानसून गायब है, यदि बारिश का आंकड़ा देखा जाए तो पिछले वर्ष की तुलना में अब तक करीब ढाई सौ एमएम बारिश कम हुई है। मानसून ने जिस तरह से अपना रंग बदला है उसका सीधा असर धान की रोपाई पर नजर आ रहा है। कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार ही जिले में लगभग 58 फीसदी ही धान की रोपाई हो पाई है। वैसे कृषि विभाग के अनुसार ही जिले में 95 फीसदी सभी जिंस की बोवनी हो चुकी है। जो स्थिति मानसून की चल रही है ऐसे में जो किसान बोवनी कर चुके है वे तनाव में है। माना जा रहा है कि यदि मानसून की यह खेंच थोड़ा और लंबा चली तो जो बीज जमीन के अंदर गया है उसका अंकुरण नहीं हो पाएगा और जो अंकुरित हो गया है वह मर जाएगा। पूर्व कृषि वैज्ञानिक व्ही.के. वर्मा का भी मानना है कि वर्तमान स्थितियों में बर्री जमीन में सबसे ज्यादा फसल नुकसान का डर है। जहां काली जमीन है वहां थोड़ा चांस है, लेकिन यही स्थिति रही तो वहां भी स्थितियां बिगड़ेगी।

- धान की रोपाई के लिए जरूरी है बारिश...
 जिले में गत वर्ष खरीफ सीजन में लगभग 43 हजार 880 हेक्टेयर में धान की बोवनी हुई थी, जबकि इस बार 44 हजार का लक्ष्य रखा गया है। गुरूवार की कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 25 हजार 500 हेक्टेयर में धान की रोपाई हो चुकी है। किसानों का कहना है कि बारिश ना होने की वजह से जो किसान धान की रोपाई की तैयारी में थे वे रूक गए है। किसानों का कहना है कि धान को पानी अधिक लगता है और बिना बारिश के बोवनी संभव नहीं है। वैसे भी तेज गर्मी को देखते हुए बिना बारिश की रोपाई नुकसानदायक है। 

- सबसे ज्यादा रकबा और बोवनी मक्का की...
बैतूल जिला जो कभी सोयाबीन का बेल्ट माना जाता था अब मक्का का गढ़ बनते जा रहा है। गत वर्ष मक्का में बेहतर कीमत ना मिलने के बावजूद इस बार भी किसानों ने मक्का पर ही भरोसा जताया है। यही कारण है कि इस बार मक्का का रकबा पिछले वर्ष से अधिक ही है। कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जिले में गत वर्ष 300 हेक्टेयर में मक्का की बोवनी हुई थी वहीं इस बार 302 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है। जिसमें से 296 हेक्टेयर में बोवनी भी हो चुकी है जो लगभग 98 फीसदी है। 

- सोयाबीन में 103 फीसदी बोवनी हो चुकी...
कृषि विभाग का रिकार्ड ही बता रहा है कि इस बार सोयाबीन में 103 फीसदी बोवनी हो चुकी है जो जिले में सर्वाधिक है। कृषि विभाग के अनुसार गत वर्ष 93 हजार 846 हेक्टेयर में सोयाबीन की बोवनी हुई थी जबकि इस बार लक्ष्य 95 हजार का रखा गया था। वहीं किसानों ने करीब 97 हजार 500 हेक्टेयर में बोवनी कर दी है जो कि लक्ष्य के मुकाबले 103 फीसदी है। इसका कारण यह बताया गया कि इस बार मई-जून में सोयाबीन के रेट 8 हजार तक पहुंच गए थे पर बारिश ना होने से वर्तमान में फसल पर खतरा है।

- किसानों के लिए खेंच को देखते हुए फसल बीमा जरूरी...
कृषि विभाग के अधिकारियों का दावा है कि वर्तमान में मानसून की खेंच के कारण फसल प्रभावित होने की कहीं से कोई सूचना नहीं है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में किसानों के लिए यह बेहतर है कि वे जल्द से जल्द वे फसल बीमा करा ले 31 जुलाई आखरी तारीख है उनका कहना है कि खेंच लंबी होने पर संकट आ सकता है।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 18 जुलाई 2026