बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। बैंक खातों में ब्याज की राशि पर बैंक द्वारा टीडीएस काट लिया जाता है और इसे रिफंड पाना आसान नहीं होता, कई बार खाताधारक या एफडी कराने वाला इस टीडीएस को क्लेम ही नहीं कर पाता और यह पैसा सरकार के पास ही रह जाता है। सामान्य तौर पर देखने में यह आता है कि टीडीएस काटने के बाद बैंक खाते में एंट्री कर देता है या मोबाईल मैसेज से सूचना दे देता है। जबकि कायदे से बैंक को उक्त उपभोक्ता को टीडीएस काटने का सर्टिफिकेट देना चाहिए जिससे कि वह अपना टीडीएस क्लेम कर सके। ग्वालियर के उपभोक्ता आयोग ने इस संबंध में स्पष्ट आदेश जारी किया है जो हर बैंक उपभोक्ता के लिए उपयोगी है। एक मामले में आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से कहा कि महज मैसेज देना या बैंक खाते में एंट्री करना बैंक की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि उसे उपभोक्ता को सर्टिफिकेट समय पर उपलब्ध कराना चाहिए। यदि बैंक ऐसा नहीं करता है तो सेवाओं में कमी मानी जाएगी। आयकर मामलों के एक एक्सपर्ट का कहना है कि बैंक द्वारा एफडी या समयअवधि आवर्ती खातों में ब्याज पर जो टीडीएस काटा जाता है उसमें से करीब 60 से 70 फीसदी मामलों में उपभोक्ता क्लेम ही नहीं कर पाता है। उनका कहना है कि बहुत से उपभोक्ता को इसकी जानकारी नहीं रहती और बहुत से ऐसे उपभोक्ता है जो हजार पांच सौ जैसा टीडीएस कटने पर क्लेम करने ही नहीं जाते और इसलिए बैंक इस मामले में उपभोक्ता के साथ अन्याय करती है। उसे टीडीएस काटने पर सूचना तो दे देती है, लेकिन सर्टिफिकेट उपलब्ध नहीं कराती है।  

- इस नियम के तहत बैंक द्वारा काटा जाता है टीडीएस...
नियमों के जानकार ने बताया कि वित्त अधिनियम 2015 के तहत आरडी या एफडी पर बैंक द्वारा 10 फीसदी तक टीडीएस काटा जाता है। यदि उसके पास पैन नंबर कार्ड नहीं है और वह बैंक खाते से अपडेट नहीं है तो यह राशि बढक़र 20 फीसदी तक हो जाती है। वहीं वरिष्ठ नागरिकों के मामले में ब्याज की राशि 50 हजार से अधिक होने पर यह टीडीएस काटा जाता है अन्यथा उन्हें ब्याज की राशि 50 हजार होने तक इस मामले में छूट दी जाती है। 

- टीडीएस ना कटे इसके लिए बैंक भरवाती है फार्म 16...
जानकार का कहना है कि यदि किसी बैंक खाते या एफडी पर टीडीएस कटने से रोकना है तो उपभोक्ता को निश्चित समय अवधि में वर्ष में एक बार बैंक जाकर फार्म 16 भरना चाहिए। टीडीएस कटने से पहले यदि फार्म 16 भर दिया जाए तो कटौती नहीं होती है। 

- कटौती के पहले बैंक नहीं देती है कोई सूचना...
सामान्य तौर पर बैंकिंग सेवा सेक्टर में आता है। ऐसी स्थिति में बैंक की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि टीडीएस कटने के एक माह पहले ही उपभोक्ता को मैसेज के माध्यम से यह सूचना दे कि उसका टीडीएस कटने वाला है। जिससे कि वह समय पर फार्म 16 भर सके और उसका टीडीएस ना कटे, लेकिन ऐसा बैंक द्वारा नहीं किया जाता है। अधिवक्ता अभिषेक दुबे का कहना है कि यह भी सेवाओं में कमी का ही एक हिस्सा है। इसको लेकर उपभोक्ता परिवाद लगा सकते है।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 26 जुलाई 2026