बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की जिम्मेदारियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। अब बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ विभिन्न विभागीय पोर्टलों पर ऑनलाइन जानकारी अपडेट करने और शैक्षणिक डाटा अपलोड करने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है, शिक्षा विभाग ने संकुल और जनशिक्षा केंद्र स्तर पर 15 प्रमुख कार्यों की प्रत्येक सप्ताह समीक्षा करने का निर्णय लिया है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि तय समयसीमा में कार्य पूरे नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों और शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पडऩे पर वेतन रोकने जैसी सख्त कार्रवाई भी की जा सकती है।
शिक्षकों का कहना है कि एक ओर उन पर विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम बेहतर बनाने का दबाव रहता है, वहीं दूसरी ओर विभागीय पोर्टलों पर लगातार अपडेट करने का अतिरिक्त बोझ भी बढ़ गया है। एजुकेशन पोर्टल, यू-डाइस, अपार आईडी, ई-केवाईसी और अन्य ऑनलाइन कार्यों को समय पर पूरा करना अनिवार्य कर दिया गया है, इन कार्यों में देरी होने पर अधिकारियों द्वारा लगातार नोटिस और चेतावनी दी जा रही है, जिससे शिक्षकों में मानसिक तनाव और असंतोष बढऩे लगा है। शिक्षा विभाग द्वारा जिन 15 बिंदुओं की साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी, उनमें कक्षा पहली में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों का नामांकन, एजुकेशन पोर्टल और यू-डाइस पर डाटा अपडेट, सभी विद्यार्थियों की अपर आईडी बनाना, आधार अपडेट, विद्यार्थियों की ई-केवाईसी, ओलंपियाड और एनएमएमएस परीक्षा के लिए पंजीयन, इको क्लब की गतिविधियां, वृक्षारोपण अभियान, इंस्पायर अवार्ड के लिए विद्यार्थियों के आइडिया अपलोड करना, मध्यान्ह भोजन व्यवस्था, समय पर आईडी मैपिंग, साइकिल वितरण तथा विद्यालयों के शैक्षणिक स्तर की समीक्षा जैसे कार्य शामिल हैं। विभाग ने निर्देश दिए हैं कि इन सभी बिंदुओं पर हर सप्ताह प्रगति रिपोर्ट तैयार की जाएगी, संकुल और जनशिक्षा केंद्र के अधिकारी नियमित रूप से इसकी निगरानी करेंगे। यदि किसी विद्यालय में कार्य अधूरे पाए गए तो पहले संबंधित शिक्षक और अधिकारी से जवाब मांगा जाएगा। इसके बाद भी सुधार नहीं होने पर विभागीय नियमों के तहत वेतन रोकने, प्रतिकूल प्रविष्टि देने और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। शिक्षकों का मानना है कि ऑनलाइन व्यवस्था पारदर्शिता और प्रशासनिक सुधार के लिए जरूरी है, लेकिन अत्यधिक पोर्टल आधारित कार्यों के कारण कक्षा शिक्षण प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि यदि अधिकांश समय ऑनलाइन डाटा भरने में ही निकल जाएगा तो विद्यार्थियों की पढ़ाई पर इसका प्रतिकूल असर पड़ सकता है। शिक्षकों ने मांग की है कि प्रशासनिक कार्यों के लिए अलग से तकनीकी या डाटा एंट्री सहयोग उपलब्ध कराया जाए, ताकि शिक्षक अपना अधिक समय विद्यार्थियों के शिक्षण और सीखने की गुणवत्ता सुधारने में लगा सकें।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 28 जुलाई 2026