भारतीय अदालतों में अपर कास्ट, हिंदू, एलीट क्लास और पुरुषों का वर्चस्व और वंशवाद?
नई दिल्ली। भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ ने देश के ज्यूडिशियरी सिस्टम में वंशवाद और पुरुष, हिंदू और अपर कास्ट का वर्चस्व होने से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि निचली अदालतों में 50 फीसदी महिलाओं की नियुक्ति हुई है और ये संख्या और बढ़ेगी. साथ ही ज्यूडिशियरी में ऊंचे और जिम्मेदार पदों पर भी महिलाएं होंगी.
पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ ने बीबीसी के शो 'हार्डटॉक' में सीनियर जर्नलिस्ट स्टीफन सेकुर के सवालों के जवाब में यह बात कही है. स्टीफन ने उनसे पूछा कि क्या इंडियन ज्यूडिशियरी में वंशवाद है और क्या एलीट क्लास, अपर कास्ट और पुरुषों का वर्चस्व है. उन्होंने जस्टिस चंद्रचूड़ के पिता और पूर्व सीजेआई वाई. वी. चंद्रचूड़ का जिक्र करते हुए वंशवाद पर सवाल पूछा.
जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि वह इन बातों से सहमत नहीं हैं, बल्कि जर्नलिस्ट ने जो बातें कहीं, स्थिति उससे बिल्कुल उलट है. उन्होंने कहा कि निचली अदालतें ज्यूडिशियर सिस्टम का आधार हैं और वहां अगर देखेंगे तो जो नई भर्तियां हुई हैं, उनमें 50 पर्सेंट महिलाएं हैं. कई राज्य ऐसे भी हैं, जहां की जिला अदालतों में 60 से 70 पर्सेंट महिलाएं नियुक्त की गई हैं. उन्होंने कहा कि जहां तक हायर ज्यूडिशियरी की बात है तो वो अभी दस साल पहले के लीगल प्रोफेशन को दशार्ती हैं और आने वाले समय में बड़े पदों पर महिलाओं की हिस्सेदारी भी देखी जाएगी. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि अभी निचली अदालतों में महिलाओं की नियुक्ति हो रही है और बहुत जल्द आप देखेंगे कि बड़े और जिम्मेदार पदों पर महिलाएं होंगी.


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