(बैतूल) अमेरिका-दुबई-लंदन तक गूंज रहा है लाडो अभियान का नाम, देश के 28 राज्यों, मध्यप्रदेश के 27 जिलों और बैतूल जिले के 135 गाँव तक पहुंचा महाभियान
- मेहनत, लगन, संघर्ष और समर्पण का दूसरा नाम है अनिल यादव ,- बेटी के नाम घर की पहचान’ अभियान के सफलता पूर्वक 10 साल पूर्ण,- एक पान की दुकान से शुरू हुई थी मुहिम, अब अमेरिका-दुबई-लंदन तक गूंज रहा है लाडो अभियान का नामबै
बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। यह पंक्ति बैतूल के युवा समाजसेवी और छोटी सी पान की दुकान चलाने वाले अनिल यादव (पहलवान) पर बिल्कुल सटीक बैठती है। अनिल यादव ने अपने जीवन के संघर्षों के बीच से एक ऐसा अभियान शुरू किया, जिसने समाज की सोच को झकझोर कर रख दिया।
8 नवंबर 2015 को बेटी आयुषी यादव के जन्मदिन से शुरू हुआ बेटी के नाम घर की पहचान।अभियान आज 10 वर्ष पूरे कर रहा है। यानी पूरे 3650 दिनों का सफर जिसमें एक घर की दीवार से निकली यह सोच अब देश और विदेश में पहचान बन चुकी है। बैतूल जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र से शुरू हुआ यह अभियान आज देश के 28 राज्यों, मध्यप्रदेश के 27 जिलों और बैतूल जिले के 135 गांवों तक पहुंच चुका है। अब तक 3900 बेटियों के नाम की नेमप्लेटें लगाई जा चुकी हैं।
यह वही मिशन है जिसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान की भावना को और ऊंचाइयों तक पहुंचाया। हर नेमप्लेट के साथ एक संदेश गया बेटी ही घर की पहचान है। यही वजह है कि यह पहल अब अमेरिका, दुबई और लंदन तक पहुंच चुकी है।
- शुरुआत में मिली आलोचनाएं...
अनिल यादव बताते हैं कि शुरुआत के समय कई तरह की आलोचनाएं हुईं। किसी ने कहा कि इससे कुछ नहीं बदलेगा, किसी ने कहा कि लोग बेटियों के नाम देखकर चिल्लाएंगे, किसी ने तंज कसा कि इसका कोई फायदा नहीं होगा। लेकिन अनिल ने हर आलोचना को नजरअंदाज किया, क्योंकि उनके इरादे मजबूत थे। आज वही लोग स्वीकार करते हैं कि इस मिशन ने समाज की सोच में सकारात्मक बदलाव लाया है।
आज घरों की नेमप्लेटों पर पिता या दादा का नहीं, बेटियों और महिलाओं का नाम लिखा जा रहा है। प्रतिष्ठानों के नाम भी अब बेटियों पर रखे जा रहे हैं। समाज में बेटी के जन्म को उत्सव की तरह मनाया जा रहा है, और माता-पिता अपनी बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।

- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बने प्रेरणा श्रोत...
लाडो फाउंडेशन की इस यात्रा में अनिल यादव के साथ बेटियों के माता-पिता, संगठन के सदस्य और पत्रकार बंधुओं का भी अहम योगदान रहा है। अनिल यादव ने कहा कि वे इस अभियान की सफलता का श्रेय देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देते हैं, जिन्होंने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसी योजना से देश में जागरूकता का वातावरण बनाया।
अनिल यादव ने माताओं, बहनों, सहयोगी साथियों और पत्रकार बंधुओं का भी धन्यवाद करते हुए कहा यह 10 साल समाज की सोच बदलने की कहानी हैं। आज अगर कोई घर बेटी के नाम से पहचाना जाता है, तो यह पूरे भारत के लिए गर्व की बात है।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 08 नवंबर 2025


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