(बैतूल) अर्धसत्य का खूबसूरत पुलिंदा मुफ्त में तो नहीं बना आईएएस अक्षत बताए कि किस मद से हुआ खर्च! - बेहद महंगी बुकलेट में मार्गदर्शक के रूप में कलेक्टर और संकलनकर्ता के रूप में जिला पंचायत सीईओ का नाम
बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। कुछ वर्षो पहले तक जिला पंचायत सहित विभिन्न सरकारी विभागों से अधिकृत रूप में स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर विज्ञापन जारी होते थे, लेकिन फिर मद और बजट ना होने का हवाला देकर इस परम्परा को बंद कर दिया गया? अब ऐसी स्थिति में हाल ही में "विकास के पथ पर बढ़ता बैतूल" नामक पुस्तक अलग-अलग शासकीय दफ्तरों में नजर आ रही है! इस पुस्तक के आखरी पेज पर जो प्रिंट लाईन दी गई है उसमें बताया गया है कि एक मीडिया संस्थान द्वारा जनहित में यह प्रकाशित की गई है? जिस तरह के कागज पर जिस तरह की प्रिटिंग के साथ यह बुकलेट बनी है उससे साफ नजर आ रहा है कि एक बुकलेट की कीमत कम से कम 1 हजार रूपए होगी? चूंकि प्रिंट लाईन में बुक लेट की प्रिंट संख्या नियम अनुसार नहीं बताई गई इसलिए यह जानना मुश्किल है कि कुल कितना खर्च हुआ? इस बुकलेट को जिसने भी देखा उसका कहना है कि यह अर्धसत्य का खूबसूरत पुलिंदा है? बड़ी-बड़ी तस्वीरों के साथ जो तथ्य पेश किए गए है वे झूठ तो नहीं लेकिन पूरा सच भी नहीं है? अब सवाल यह है कि अधूरा सच बुकलेट के रूप में पेश करने में कितना बजट किस मद से खर्च हुआ? इस सवाल का जवाब देना जिला पंचायत सीईओ अक्षत जैन की जिम्मेदारी है? वजह यह है कि इस बुकलेट के आखरी पेज में मार्गंदर्शक के रूप में कलेक्टर नरेन्द्र सूर्यवंशी और संकलनकर्ता का नाम जिला पंचायत सीईओ अक्षत जैन लिखा हुआ है? अब ऐसी स्थिति में जो कंटेंट बुकलेट में है उसे देखकर तो साफ नजर आ रहा है कि यह फार्मल कंटेट है यह सामान्य रूप से गुगल पर ही उपलब्ध है! इसे संकलित करने के लिए जिला पंचायत सीईओ की जरूरत ही नहीं है? इसलिए बुकलेट को देखने वालों का मानना है कि इसके प्रिंट में जो खर्च हुआ है उसके बजट का संकलन जरूर जिला पंचायत सीईओ ने किया होगा? इसलिए पारदर्शिता के नाते उन्हें सबकुछ सार्वजनिक करना चाहिए?
- इनका कहना...
- वह संस्थान मुफ्त में पसीना भी ना दे...
बुकलेट छापने वाला मीडिया संस्थान की जो पॉलिसी है वे जनहित में मुफ्त में कुछ नहीं करते।
- अमिताभ तिवारी, पूर्व फोटो जर्नलिस्ट दैनिक भास्कर ।
- जनहित में है तो घर-घर क्यों नहीं पहुंची...
जनहित में है तो उस संस्थान ने अखबार के साथ घर-घर तक यह बुकलेट क्यों प्रसारित नहीं करवाई।
- धीरज सोनू अवस्थी,
ब्यूरोचीफ, अक्षर सम्राट।
- भुगतान की जांच जरूर होना चाहिए...
यह सब अफसरों की मानसिकता और नियत पर सवाल है? जांच होना चाहिए कि भुगतान कैसे हुआ?
राजू धोटे, ब्यूरोचीफ, देशबंधु।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 20 नवंबर 2025


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