बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा।  अवैध कालोनाईजर किस स्तर पर और कैसा फर्जीवाड़ा करते है इसका ताजा तरीन उदाहरण ओमप्रकाश भोले और देवेन्द्र राजपूत द्वारा काटी गई कालोनी है? यहां पर इन्होंने लालाप्रसाद पवार बैतूलबाजार से ग्राम पंचायत आरूल के पटवारी हल्का हनौतिया में एक एकड़ जमीन खरीदी थी। यह जमीन कुल 43 हजार वर्गफुट है, लेकिन ओमप्रकाश भोले और देवेन्द्र ने जो कुल प्लॉटो की रजिस्ट्री की है उसमें 44 हजार 900 वर्गफुट रकबा हो रहा है! अब सवाल यह है कि जब इनका रकबा 43 हजार ही है तो इन्होंने 44 हजार 900 वर्गफुट जमीन बेच कैसे दी? यह सब इसलिए संभव हो पाया कि 19 मई 2023 से लेकर अभी तक जितने भी पटवारी उक्त हल्के में पदस्थ रहे और इस दौरान जो भी तहसीलदार तथा एसडीएम रहे उन्होंने जानबूझकर इन्हें ऐसा करने का मौका दिया? इनके द्वारा जो प्लॉट बेचे गए क्या उनका नामांतरण कराने कोई भी तहसील नहीं गया? जब वह तहसील गया तो हल्का पटवारी ने तत्काल इसकी सूचना तहसीलदार और डायवर्सन आरआई को क्यों नहीं दी, उसने अवैध कालोनी का प्रतिवेदन क्यों नहीं दिया? यदि प्रतिवेदन दिया तो डायवर्सन आरआई और तहसीलदार ने क्या किया? पूरे मामले में एक बात तो साफ नजर आ रही है कि उक्त दोनों अवैध कालोनाईजरों को इस तरह का जमीन घोटाला करने में कहीं ना कहीं राजस्व के अधिकारी और कर्मचारियों ने ही अघोषित रूप से अपनी भूमिका अदा की है? नहीं तो यह संभव ही नहीं था?

- सडक़, नाली, पार्क आदि की जमीन भी बेच डाली...
किसी भी कालोनी में सडक़, नाली और पार्क आदि के लिए ओपन स्पेस जमीन छोडऩे का प्रावधान रहता है, इसके बिना ना तो टीएनएसपी होती है और ना ही कालोनी विकास की अनुज्ञा मिलती है? ओमप्रकाश भोले और देवेन्द्र राजपूत ने 43 हजार भूमि में से जो 44 हजार 900 वर्गफुट जमीन बेची उसमें सडक़, नाली और ओपन स्पेस भी बेच डाला?

- मे - से में हुआ खेल...
देवेन्द्र और भोले लगातार प्लॉटो की रजिस्ट्रीयां करते रहे? मे - से के आधार पर धड़ाधड़ रजिस्ट्रीयां हुई? जबकि यहां पर देवेन्द्र के खाते में मात्र 15 हजार वर्गफुट जमीन थी मगर इससे ज्यादा उसने बेच डाली? यहीं भोले ने भी किया?
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 22 नवंबर 2025