बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा।  राजस्व विभाग में राजस्व के अलग-अलग कामकाज के आधार पर रैंकिंग होती है और इसकी हर स्तर पर समीक्षा भी होती है। सीएस, पीएस से लेकर कमिश्रर और कलेक्टर तक निरंतर मॉनीटरिंग करते है। इस मॉनीटरिंग सिस्टम में राजस्व के किस काम में क्या रैकिंग है इस पर बड़ा फोकस रहता है। राजस्व प्रकरणों के निपटारे के लिए इस तरह का सिस्टम बनाने के बाद भी स्थिति यह है कि एक वर्ष से अधिक लंबित प्रकरणों का निराकरण नहीं होता। इन प्रकरणों की जो संख्या 6 माह पहले थी वह आज भी है क्यों कि इन पर कोई ध्यान ही नहीं देता। जो नए प्रकरण आरसीएमएस पोर्टल पर दर्ज होते है उन्हीं का जैसे-तैसे निपटारा कर रैकिंग को बनाए रखा जाता है बैतूल में ही कुछ ऐसा ही हो रहा है। स्थिति यह है कि समीक्षा में पांच वर्ष से अधिक लंबित प्रकरणों की संख्या एक वर्ष पहले भी तीन थी और आज भी तीन है। इसी तरह 2 से 5 वर्ष तक लंबित प्रकरणों की संख्या 286 पहले भी थी और अभी भी है। वहीं एक से दो वर्ष तक लंबित प्रकरणों की संख्या पहले से 243 थी वह अभी भी है। इसी तरह 6 से 1 माह तक लंबित प्रकरणों की संख्या 459 अभी भी बरकरार है। अब ऐसा क्यों है यह बड़ा सवाल है। राजस्व में 23 नवम्बर की स्थिति में निपटारे का प्रतिशत 83.81 बताया जा रहा है। तो फिर सवाल यही है कि एक वर्ष से अधिक लंबित प्रकरणों का निराकरण क्यों नहीं हो रहा उनकी संख्या क्यों कम नहीं हो रही। मतलब साफ है कि पूरा फोकस रैकिंग पर है। 

- ऐसे हो रहा निपटारा...
1 - अविवादित नामांत्रण के 19 हजार 570 प्रकरण पंजीकृत बताए गए। इसमें से 23 नवम्बर की स्थिति में 17 हजार 127 का निराकरण बता दिया गया।
2 - वहीं अविवादित बंटवारे के 3 हजार 339 प्रकरण पंजीकृत बताए गए इसमें से 2 हजार 774 का निराकरण बता दिया गया। सीमांकन के 7 हजार 287 प्रकरण पंजीकृत बताए गए इसमें से 6 हजार 79 का निराकरण बता दिया गया है। 

- इनका कहना...
जो प्रशासनिक सिस्टम है उसमें निराकरण की यदि पड़ताल की जाए तो यह आंकड़े कुछ कहानी भी बताएंगे। रैंकिंग के लिए जिस तरह से प्रकरणों को निपटाया जा रहा है। वह जांच का विषय है। जो जनप्रतिनिधि समीक्षाओं में अधिकारियों के साथ बैठते है वे इस तरह के मामलों को उठाते ही नहीं है।
हेमंत वागद्रे, पूर्व अध्यक्ष, जिला कांग्रेस।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 25 नवंबर 2025