(बैतूल) ढावले के खेत में प्लॉट काटकर 38 रजिस्ट्रीयां कर चुके है ओमप्रकाश भोले और देवेन्द्र राजपूत , - इन अवैध कालोनाईजरों ने शासन को चूना लगाने के साथ-साथ आम लोगों को भी ठगा
बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। ओमप्रकाश भोले और देवेन्द्र शेखर राजपूत से जिन्होंने ने भी उनकी कालोनी में प्लॉट खरीदे है वे सब हैरान परेशान है और अपना माथा कूट रहे है? इन दोनों कथित कालोनाईजरों द्वारा जो कुछ अवैध किया गया इसमें कहीं ना कहीं राजस्व के अधिकारी और कर्मचारियों का कहीं ना कहीं योगदान जरूर रहा है? ओमप्रकाश भोले और देवेन्द्र राजपूत की अवैध कालोनियों की पूरी जानकारी आरआई राहुल इवने और पूर्व एसडीएम राजीव कहार को अच्छे से थी। ओमप्रकाश भोले और देवेन्द्र राजपूत ने जो गणेश ढावले की खसरा नंबर 220/6 में अवैध कालोनी काटी है यहां पर प्लॉट खरीदने वाले एक क्रेता ने बताया कि कोई मूलभूत सुविधा ना होने और बही ना बनने को लेकर वे जब भी ओमप्रकाश भोले और देवेन्द्र राजपूत को फोन करते है तो वे उनका अटेंड नहीं करते है? इस कालोनी को लेकर यह भी सामने आ रहा है कि कुछ क्रेताओं की बही पटवारी और तात्कालीन तहसीलदार से सांठगांठ कर ओमप्रकाश भोले ने बनवाई भी है, लेकिन ज्यादातर की नहीं बनी है? ओमप्रकाश भोले और देवेन्द्र शेखर राजपूत ने गणेश ढावले पिता बिहारी ढावले 16 नवम्बर 2017 को रकबा 0.558 हेक्टेयर जमीन खरीदी थी। जिसका रजिस्ट्री क्रमांक एमपी 039742017ए1639582 है। इन्होंने यहां पर लेआउट डालकर उक्त खसरा नंबर 220/6 में रकबा 0.36 हेक्टेयर अर्थात 39 हजार 288 वर्गफूट जमीन की रजिस्ट्री 38 लोगों को की जा चुकी है? मतलब साफ है कि उक्त दोनों अवैध कालोनाईजरों ने जितनी जमीन सडक़, नाली, बिजली, पानी, ओपन एरिया के लिए छोडऩी थी वह नहीं छोड़ी है? सबसे बड़ी बात यह है कि वहां पर प्लॉट खरीदने वालों के नामांतरण अब तक नहीं हो रहे है? इसके बाद भी पूर्व और वर्तमान पटवारी ने एसडीएम कार्यालय में अवैध कालोनी का प्रतिवेदन नहीं दिया है? यदि पूर्व में दिया भी होगा तो स्वाभाविक है कि एसडीएम कार्यालय में जिस कमरे में अवैध कालोनियों का हिसाब किताब होता है वहां पर तात्कालिन एसडीएम की सहमति से तात्कालीन डायवर्सन आरआई ने बढिय़ा हिसाब-किताब कर दिया होगा और इसलिए कालोनी को प्रबंधन में नहीं लिया गया? खैर यहां पर जिन्होंने प्लॉट खरीदे है वे इस बात का इंतजार नहीं करें कि देवेन्द्र राजपूत और ओमप्रकाश भोले और आकर इस कालोनी को वैध कराएंगे? बेहतर होगा कि वे कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचे। जब किसी कालोनाईजर की एक अवैध कालोनी सामने आती है तो उसके द्वारा काटी गई अन्य कालोनी की भी जानकारी प्रशासन को लेना चाहिए, लेकिन लेते नहीं है?
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 02 दिसंबर 2025


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