भोपाल: मध्य प्रदेश में कुदरत के दो अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं, जहां राज्य का एक बड़ा हिस्सा भीषण तपिश और लू की चपेट में है, वहीं दूसरी ओर कई जिलों में प्री-मानसून गतिविधियों ने दस्तक दे दी है। मौसम विभाग (IMD) ने ग्वालियर संभाग सहित प्रदेश के 18 जिलों के लिए 'यलो अलर्ट' जारी करते हुए नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। इन इलाकों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने और वज्रपात (बिजली गिरने) की आशंका जताई गई है, जिससे अचानक मौसम बदलने की संभावना है।

ग्वालियर समेत 18 जिलों में यलो अलर्ट

मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य के उत्तरी और मध्य हिस्सों में विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। ग्वालियर, चंबल और आसपास के 18 जिलों में अगले 24 से 48 घंटों के दौरान मौसम में बड़े बदलाव देख जा सकते हैं। इस चेतावनी के अनुसार, 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं और धूल भरी आंधी के साथ हल्की बौछारें पड़ने की उम्मीद है। विभाग ने किसानों और खुले में काम करने वाले लोगों को बिजली चमकने के दौरान सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की अपील की है।

तापमान में गिरावट से मिली मामूली राहत

पिछले कुछ दिनों से प्रदेश के विभिन्न संभागों में छिटपुट बारिश और बादलों की आवाजाही के कारण पारे में गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार, कई शहरों में सामान्य तापमान औसत से 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक कम बना हुआ है, जिससे लोगों को झुलसाने वाली गर्मी से आंशिक राहत मिली है। हालांकि, नमी बढ़ने के कारण उमस की स्थिति भी पैदा हो रही है, जो लोगों की बेचैनी बढ़ा रही है। विभाग का कहना है कि यह स्थिति अगले कुछ दिनों तक बनी रह सकती है।

गर्मी और लू का दोहरा संकट

एक तरफ जहां कुछ जिलों में बारिश की चेतावनी है, वहीं प्रदेश के शेष हिस्सों, विशेषकर पश्चिमी मध्य प्रदेश में सूरज के तेवर अभी भी सख्त बने हुए हैं। राजस्थान से आने वाली गर्म हवाओं के कारण मालवा और निमाड़ के कुछ क्षेत्रों में लू (Loo) का असर देखा जा रहा है, जिससे दिन का तापमान अभी भी काफी अधिक बना हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अलग-अलग वायुमंडलीय प्रणालियों के सक्रिय होने के कारण एक ही राज्य के भीतर मौसम का यह विरोधाभास देखने को मिल रहा है।