‘वंदे मातरम’ को मिला राष्ट्रीय गान के बराबर सम्मान, देशभर में खुशी की लहर
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित केंद्रीय कैबिनेट की पहली औपचारिक बैठक में एक युगांतरकारी निर्णय पर मुहर लगाई गई है। इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान केंद्र सरकार ने बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समान दर्जा देने के प्रस्ताव को आधिकारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। बैठक की शुरुआत में सभी कैबिनेट मंत्रियों ने बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के प्रदर्शन के लिए प्रधानमंत्री का अभिनंदन किया, जिसके पश्चात राष्ट्र के सांस्कृतिक गौरव को कानूनी मजबूती देने वाले इस ऐतिहासिक कदम को आगे बढ़ाया गया।
राष्ट्रीय गौरव और कानूनी संशोधन की नई दिशा
सरकार ने इस महत्वपूर्ण फैसले को अमली जामा पहनाने के लिए 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम' में आवश्यक संशोधन करने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। इस बदलाव का सीधा अर्थ यह है कि अब 'वंदे मातरम' के गायन और सम्मान को लेकर वही कड़े नियम और प्रतिबंध प्रभावी होंगे जो वर्तमान में राष्ट्रगान के लिए निर्धारित हैं। यह निर्णय इसलिए भी विशेष है क्योंकि देश इस समय इस कालजयी गीत की 150वीं वर्षगांठ मना रहा है, जिसे देखते हुए सरकार ने इसकी गरिमा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। अब 'वंदे मातरम' का किसी भी प्रकार का अनादर एक संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आएगा, जिससे इसकी संवैधानिक और सांस्कृतिक स्थिति और अधिक सुदृढ़ हो जाएगी।
कड़े दंडात्मक प्रावधान और गरिमा की सुरक्षा
नया कानून लागू होने के बाद 'वंदे मातरम' के अपमान या इसके गायन में जानबूझकर व्यवधान डालने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। वर्तमान नियमों के अनुसार राष्ट्रगान का अनादर करने पर दोषी को तीन वर्ष तक के कारावास अथवा जुर्माने का सामना करना पड़ता है, और अब यही दंडात्मक व्यवस्था राष्ट्रीय गीत के लिए भी लागू होगी। यदि कोई व्यक्ति इस अपराध को दोहराता है, तो उसके लिए कम से कम एक वर्ष की अनिवार्य जेल का प्रावधान रखा गया है। यह पहल पूर्व में वर्ष 2005 में हुए उस संशोधन की याद दिलाती है जिसके माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज के अपमानजनक उपयोग पर पूर्णतः रोक लगाई गई थी।
ऐतिहासिक मांग और संसदीय चर्चा का परिणाम
राष्ट्रीय गीत को राष्ट्रगान के समकक्ष सम्मान दिलाने की यह मांग लंबे समय से विभिन्न स्तरों पर उठती रही है, जिसे अब जाकर कानूनी मान्यता मिली है। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष दिसंबर में संसद के भीतर 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित विशेष चर्चा के दौरान इस विषय पर गहन मंथन हुआ था। उस समय सांसदों ने पुरजोर तरीके से यह प्रस्ताव रखा था कि स्वाधीनता संग्राम की प्रेरणा रहे इस गीत को वह संवैधानिक सुरक्षा मिलनी चाहिए जिसका यह हकदार है। कैबिनेट का यह ताजा फैसला न केवल उन संसदीय भावनाओं का सम्मान करता है बल्कि राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति देश की प्रतिबद्धता को भी वैश्विक पटल पर रेखांकित करता है।


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