बैतूल(हेडलाइन)/नवल वर्मा। इस वर्ष ग्रीष्मकाल में पेयजल संकट एक बड़ा मुद्दा है और अलग-अलग जगह से पेयजल संकट को लेकर सूचनाएं सामने आती है। पेयजल संकट का बड़ा कारण भू-जल स्तर का अत्यधिक मात्रा में नीचे जाना बताया जा रहा है और इसलिए निजी बोर सहित नलजल योजनाओं के बोर दम तोड़ रहे है। पीएचई के अधिकारियों के आंकलन और रिसर्च के अनुसार इस बार जल संकट अधिक होने का कारण तीन फैक्टर है। उनका कहना है कि यदि यह तीन फैक्टर नहीं होते तो इस तरह की स्थितियां सामने नहीं आती। उनकी रिपोर्ट के अनुसार करीब 85 नलजल योजनाएं बंद हो चुकी है, इसमें से कुछ उन्होंने चालू भी कर दी है, लेकिन जो बाकी है वह केवल भू-जल स्तर बहुत ज्यादा नीचे नहंी होने के कारण शुरू नहीं कर पा रहे है। यदि यही फैक्टर आगे भी इसी तरह बढ़ते रहे तो भू-जल वाले स्त्रोत आने वाले समय में भी गर्मी में समस्या खड़ा करेगा।

- फैक्टर 01 : साल दर साल जिले में बढ़ता गन्ने का रकबा...
बैतूल जिले में गन्ने की खेती पहले भी होती थी लेकिन उन्हीं क्षेत्रों में होती थी जहां पानी पर्याप्त था और गुड़ बनाया जाता था, लेकिन जबसे बैतूल जिले में अलग-अलग क्षेत्र में शक्कर मिल खुलना शुरू हुई और किसानों को गन्ने के अच्छे रेट मिलना शुरू हुए तबसे गन्ने की खेती पर किसानों का फोकस बढ़ा है। वर्तमान में करीब 30 हजार हेक्टेयर में गन्ने की खेती होती है। अन्य फसलों के मुकाबले गन्ने की खेती में ज्यादा पानी लगता है। इसलिए किसान नलकूप से सिंचाई कर भू-जल का दोहन कर रहे है।

- फैक्टर 02 : जिले में बढ़ता गर्मी की मंूग का रकबा...
पिछले तीन-चार वर्ष से बैतूल जिले में तीसरी फसल को लेकर किसानों का रूझान बढ़ा है। गत वर्ष करीब 19 हजार हेक्टेयर में किसानों ने गर्मी की मंूग की बोवनी की थी। वहीं इस वर्ष भी यह रकबा बढक़र करीब 24 हजार हेक्टेयर तक पहुंच चुका है। जिन क्षेत्रों में नहर से सिंचाई नहीं है वहां भी किसानों ने गर्मी की मंूग की फसल ली है और उनके द्वारा नलकूप से ही सिंचाई की जा रही है। गर्मी के कारण इस फसल में अन्य सीजन की फसलों के मुकाबले ज्यादा पानी खर्च होता है। 

- फैक्टर 03 : नवम्बर-दिसम्बर में बारिश ना होना...
पीएचई की मानना है पिछले दो वर्ष से रबी सीजन की बोवनी के समय बारिश ना होना भी भू-जल के अधिक दोहन का कारण है। उनका मानना है कि रबी सीजन में बोवनी के समय या उसके बाद एक बार पानी हो जाने से 10 से 15 दिन तक किसान सिंचाई नहीं करता है और इस दौरान नलकूप बंद रखता है। इससे वॉटर लेबल मेंटेन रहता है जो इस बार नहीं हो पाया है। इससे भी वाटर लेबल नीचे चला गया है।
नवल वर्मा हेडलाइन बैतूल 01 जून 2026